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कुछ अनमोल रिश्ते

सच्चिदानंद किरण
भागलपुर (बिहार)
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दोस्ती निभे यूँ दोस्तों की बोल-चाल पर,
दुःख तकलीफों में साथ-साथ चल कर।

रूपए-पैसों के लेन-देन से बढ़ती है दूरियाँ,
आत्म सम्मान रक्षा में कभी न परेशानियाँ।

कलयुगी रिश्ते रक्तिम हो के भी मनमुटाव,
पराए तो होते अपने! होते कभी न टिकाऊ।

बुजर्गों के दिन कटते हैं खानदानी रखवाली,
कुछ तो उम्र का तकाजा है, तो कुछ घरवाली।

उच्च शिक्षा और परिवेश ढा रहे सितम,
अब वो दिन ना रहे, जहाँ निभे प्रेम-प्रीतम।

जलते देख रहे सुखों का महल-अटारी लोग,
तनिक दया नहीं आती यूँ जब मुँह मोड़े लोग।

सोच विपरीत हो गई एक दूसरे की खातिर,
सह सहायक बनने को मानवता की खातिर।

उम्मीद और आशाएँ इंतजार बेदम हो कराती,
जीवन सुगम बने ये ही उम्मीद रह रह सताती॥

परिचय- सच्चिदानंद साह का साहित्यिक नाम ‘सच्चिदानंद किरण’ है। जन्म ६ फरवरी १९५९ को ग्राम-पैन (भागलपुर) में हुआ है। बिहार वासी श्री साह ने इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की है। आपके साहित्यिक खाते में प्रकाशित पुस्तकों में ‘पंछी आकाश के’, ‘रवि की छवि’ व ‘चंद्रमुखी’ (कविता संग्रह) है। सम्मान में रेलवे मालदा मंडल से राजभाषा से २ सम्मान, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ (२०१८) से ‘कवि शिरोमणि’, २०१९ में विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ प्रादेशिक शाखा मुंबई से ‘साहित्य रत्न’, २०२० में अंतर्राष्ट्रीय तथागत सृजन सम्मान सहित हिंदी भाषा साहित्य परिषद खगड़िया कैलाश झा किंकर स्मृति सम्मान, तुलसी साहित्य अकादमी (भोपाल) से तुलसी सम्मान, २०२१ में गोरक्ष शक्तिधाम सेवार्थ फाउंडेशन (उज्जैन) से ‘काव्य भूषण’ आदि सम्मान मिले हैं। उपलब्धि देखें तो चित्रकारी करते हैं। आप विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य होने के साथ ही तुलसी साहित्य अकादमी के जिलाध्यक्ष एवं कई साहित्यिक मंच से सक्रियता से जुड़े हुए हैं।