कुल पृष्ठ दर्शन : 1

कृति ‘मन अनहद नाद’ व ‘अनकहे से संवाद’ का हुआ विमोचन

इंदौर (मप्र)।

वामा साहित्य मंच के तत्वावधान में साहित्यिक समारोह हुआ। इसमें साहित्यकार डॉ. अंजना चक्रपाणि मिश्र के काव्य संग्रह ‘मन अनहद नाद’ और आलेख संग्रह ‘अनकहे से संवाद’ का शुचित विमोचन किया गया।
   मंच की प्रचार प्रमुख सपना साहू ‘स्वप्निल’ ने बताया कि ​लेखिका की नातिन अलाइना ने गणेश वंदना तथा माँ सरस्वती वंदना लब्धप्रतिष्ठ गायिका आकांक्षा जाचक शेट्टी ने मधुर स्वर लहरी से करके वातावरण को आध्यात्मिक कर दिया। मंच की अध्यक्ष ज्योति जैन ने शब्द पुष्पों से सभी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लेखिका तत्सम शब्दों का प्रयोग करती हैं और समाज की विसंगतियों को उजागर करती हैं। दोनों पुस्तकें बहुत ही उम्दा हैं।
​निष्ठा मिश्र ने इस दिन को खास बताते हुए कहा कि माँ की रचनाएं पढ़ने में कठिन हैं, पर वे माँ के प्रयास और जुनून का उत्सव हैं।
​लेखिका ने उपस्थिति को प्रणाम करते हुए कहा कि मेरी पुस्तकें मेरा दर्पण हैं, वे आपको मुझसे रूबरू करवाएंगी। मैं लोगों के सुख-दुख को सोचती हूँ व खुद को उनकी जगह रखकर सोचती और लिखती हूँ। उन्होंने ‘रजत राग-चंदनियां गुनगुना रही है…’ गीत सुनाकर सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया।
​दोनों कृतियों पर सारगर्भित चर्चा करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गरिमा संजय दुबे ने कहा कि लेखन व पठन ऐसी क्रियाएं हैं, जो एकांत में घटती हैं और यह प्रेम आपको अपने में जकड़ लेता है। लेखिका ने गद्य व पद्य दोनों पर न्याय किया है, जो कठिन कार्य है। ये पुस्तकें संवादों का प्रतिबिंब हैं और एक-दूसरे की पूरक हैं।
समाज के ऐसे विषय जिन पर कम लिखा जाता है, जैसे रजोनिवृत्ति पर भी लिखा गया है।
    मंच की संस्थापक अध्यक्ष पद्मा राजेंद्र ने इसे स्नेह, प्रसन्नता व गर्व की अनुभूति बताया। विशिष्ट अतिथि सामान्य प्रशासन विभाग की पूर्व सचिव शैलबाला मार्टिन पाठक ने कहा, कि लेखिका की कविताएं अंतर्मन की अभिव्यक्ति हैं जो भावनाओं को कलात्मक रूप से प्रस्तुत करती हैं और सोचने पर मजबूर करती हैं। उन्होंने ‘संवेदना’ और ‘बनारस की गलियाँ’ कविता का वाचन किया।
​आकांक्षा जाचक ने लेखिका को विलक्षण प्रतिभा की धनी बताया और डॉ. चक्रपाणि कृत ‘चेती’ गीत सुनाया।
​मुख्य अतिथि साहित्यकार पंकज सुबीर ने कृतियों की तुलना बेटियों से की। उन्होंने कहा कि रजोनिवृत्ति जैसा विषय जो चुना है, यह वही विषय है जिसे लोग छोड़ रहे हैं। उन्होंने ‘स्त्री बोलने पर’ लिखी है, जो शब्द शंखनाद हैं और जिन्हें आगे स्त्रियों को सुनना है। स्त्री लिख रही है, यह हमारे समय की वास्तविक उपलब्धि है।
​ अतिथियों का स्वागत चक्रपाणि मिश्र, राकेश पाठक व अमर कौर चड्ढा ने किया।
    कुशल संचालन वरिष्ठ कवयित्री प्रीति दुबे ने किया। चक्रपाणि दत्त ने आभार व्यक्त किया।