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कोमल चरण

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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पुत्र को देख, बावरी हुई कौशल्या माता,
सीने से लगा के रो पड़ीं कौशल्या माता।

आज मुझको जी भर के, देखने दो राम,
आँखों में खुशी के आँसू, बहने दो राम।

तुझको मैं याद नहीं आती थी, कहो राम,
हे पुत्र लगता है, भूल गए थे मेरा नाम।

सन्त कहते हैं-तुम भगवान् हो, मेरे राम,
त्रिभुवन की रक्षा करना, तुम्हारा है काम।

पूछती हैं माता कौशल्या, कहो पुत्र राम,
चौदह साल बिताए वन में, कैसे-कैसे राम ?

मखमल-सा बदन तेरा, कोमल से चरण,
तुझको दर्द भी, होती होगी काँटों की चुभन।

बोलती हैं माता कौशल्या-सुनो पुत्र राम,
प्रजा को संभालना, अब तेरा ही है काम।

पहन लो राजमुकुट, छोड़ दो तीर-कमान,
देखो तुम्हें ‘देख के हर्षित है’ सारा जहान॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |