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खूनी है अब आचरण

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)

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जीवन है विपरीत अब, सब कुछ है प्रतिकूल।
फूलों की बातें नहीं, चुभते हैं नित शूल॥

रोज़ विहँसता झूठ अब, हार गई मुस्कान।
सच्चा अवसादों घिरा, मिथ्या का है मान॥

संदेहों का ताण्डव, बिलख रहा विश्वास।
हर इक अब मायूस है, नहीं शेष अब आस॥

कैसा कलियुग आ गया, बदल गया इंसान।
दौलत के पीछे लगा, तजकर सब सम्मान॥

बदल गया इंसान अब, भूल गया ईमान।
पाकर दौलत बन गया, मानो ख़ुद भगवान॥

नैतिकता को तज करे, पोषित वो अँधियार।
इंसां अब इंसान ना, बना हुआ अख़बार॥

प्यार, वफ़ा और सत्य अब, ना इंसां के पास।
भावों का खोया हुआ, देखो अब अहसास॥

रिश्ते सारे टूटते, स्वारथ का बाज़ार।
बदला है इंसान का, आज सकल आचार॥

इंसां खो संवेदना, बना हुआ पाषाण।
चला रहा अविवेक के, वह अब नित ही बाण॥

इंसां ने अब खो दिया, अपनेपन का भाव।
भाईचारा है नहीं, भौतिकता का ताव॥

नारी-नर अब छोड़कर, सारा चाल-चरित्र।
बने हुए हैं आजकल, मानो हों चलचित्र॥

नारी वस्त्र उतारकर, बनी हुई गतिशील।
कब का खोया नार ने, भीतर का सब शील॥

बदल गया इंसान अब, बना हुआ है यंत्र।
इसीलिए तो ज़िन्दगी, मानो हो संयंत्र॥

बदल गया इंसान अब, उसका कपटी रूप।
इसीलिए तीखी लगे, मक्कारी की धूप॥

सब उदारता हो गया, मानव अब अनुदार।
दयाभाव अब शोष ना, हिंसा का व्यवहार॥

ख़ूनी है अब आचरण, सत्य गया है रूठ।
मानव को अब भा रहा, केवल-केवल झूठ॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।