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सूरज देवता, कुछ तो समझाइए

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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हे सूरज देव !
कुछ तो बता जाइए
इतनी क्यों है जलन आपमें, कुछ तो समझ जाइए।

अपने हैं कौन जग में, अब तो बता जाइए,
प्रेम की बातें कैसे समझूँ, कुछ तो समझ जाइए
जग में जीने के लिए खुद को कैसे समझाऊं, समझाइए।

इस घोर कलयुग में, कलह कैसे खत्म हो बता जाइए,
साधना मेरी सफल हो, सूरज देव अब तो समझ जाइए।

ना समझे कोई माँ-पिता को,
ना समझे यहाँ कोई इंसान, इंसान को
अब तो अपनी शीतलता दिखा जाइए।

जल भी नहीं अब जग में,
हवा भी नहीं अब शुद्ध जग में,
पक्षी भी नहीं, डाली भी नहीं
अब तो हर तरफ एक-दूसरे
की जंग आपस में छिड़ी है,
शांत हो के सूरज देव, कुछ तो जग को बता जाइए।

जैसे श्री हनुमान को हनुमंत आपने बनाया,
वैसे ही इस संसार को अब रास्ता कोई अच्छा दिखा जाइए
जो पेड़-पौधे नष्ट कर रहे हैं उन्हें, पर्यावरण सुरक्षा की कुछ प्रेरणा तो बता जाइए।
अब आप शीतल हवा जग को दे जाइए॥