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गणेश विसर्जन

राधा गोयल
नई दिल्ली
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गली में जोर-शोर से गणपति विसर्जन की तैयारी हो रही थी। ढोल बज रहे थे। रथ में शोभित गणपति जी की प्रतिमा और पीछे पुरुष-स्त्री व बच्चों की फौज। बच्चे उल्लसित होकर जयकारा बोल रहे थे-
‘गणपति बप्पा मोरया,
अगले बरस तू जल्दी आ
बप्पा मोरया रे,
बप्पा मोरया रे।’
बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। छोटे बच्चे ज्यादा ही चिंहुक रहे थे।
रोहित ने अपनी माँ से पूछा- “माँ! आप एक बार कह रही थीं कि, गणेश जी को कभी भी विदा नहीं करना चाहिए।”
“हाँ बेटा! गणेश जी को कभी भी विदा नहीं करना चाहिए, क्योंकि विघ्नहर्ता ही अगर विदा हो गए विघ्न कौन हरेगा ?
“फिर आप इसका विरोध क्यों नहीं करतीं ?”
“रोहित! मन तो करता है कि कहूँ, लेकिन लोगों की आस्था देखकर चुप लगा जाती हूँ।तुझे पता है ना कि पहले हमारी गली के लोग तुलसी विवाह करते थे। उस पर कितना खर्च करते थे। बेटी के विवाह में जितना दान-दहेज दिया जाता है, वो सब देते थे। गृहस्थी के सारे सामान के अलावा साड़ियाँ, दान-दहेज के कपड़े और सोने के आभूषण तक। ये सारा सामान पण्डित जी के यहाँ चला जाता था।धीरे-धीरे इन लोगों के दिमाग में यह बात बैठाई कि इससे अच्छा है कि किसी
बाई-नौकर की विवाह योग्य कन्या के लिए वह सारा सामान दे दो। अब तूने देखा ना।लड़की के माता-पिता और बहन-भाई आते हैं। गली के लोग धूमधाम से शादी की बधाई के गीत गाकर खूब गाना बजाना करते हैं और दहेज का सारा सामान और कैश लड़की के माता-पिता को दे देते हैं। लोग भी खूब बढ़ -चढ़कर दान करते हैं। किसी निर्धन कन्या का घर-संसार बस जाता है। गणपति विसर्जन के बारे में भी लोगों को जागरूक करूँगी, थोड़ा समय लगेगा।
रोहित बेटा! सच्चाई यह है कि कुछ लोग तो आस्था के कारण और बच्चों में अपने देश के त्योहारों के प्रति जागरूकता फैलाने के कारण ऐसा करते हैं। आजकल की पीढ़ी हमारे जीवन मूल्य और संस्कृति को भूलती जा रही है। अधिकतर लोग एक-दूसरे की देखा-देखी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं और ३ या ५ या ७ या ११ दिन की पूजा के उपरांत उनका विसर्जन भी करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि विसर्जन केवल महाराष्ट्र में ही होता है।”
“केवल महाराष्ट्र में ही क्यों माँ ?”
“क्योंकि, गणपति वहाँ एक मेहमान बनकर गए थे। वहाँ लाल बाग के राजा कार्तिकेय ने अपने भाई गणेश जी को अपने यहाँ बुलाया और कुछ दिन वहाँ रहने का आग्रह किया था, जितने दिन गणेश जी वहाँ रहे, उतने दिन माता लक्ष्मी और उनकी पत्नी रिद्धि-सिद्धि वहीं रहीं। इनके रहने से लालबाग धन धान्य से परिपूर्ण हो गया, तो कार्तिकेय जी ने उतने दिन का गणेश जी को लालबाग का राजा मानकर सम्मान दिया। यही पूजन गणपति उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।
अब रही बात देश के अन्य स्थानों की… तो गणेश जी हमारे घर के मालिक हैं और घर के मालिक को कभी विदा नही करते। अगर हम गणपति जी का विसर्जन करते हैं, तो उनके साथ लक्ष्मी जी व रिद्धि-सिद्धि भी चली जाएंगी। तो जीवन में बचा ही क्या! हम बड़े शौक से कहते हैं गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ। इसका मतलब हमने १ वर्ष के लिए गणेश जी, लक्ष्मी जी आदि को जबरदस्ती पानी में बहा दिया। तो तू खुद सोच कि हम किस प्रकार से नवरात्रि पूजा करेंगे, किस प्रकार दीपावली पूजन करेंगे ? और क्या किसी भी शुभ कार्य को करने का अधिकार रखते हैं, जब हमने उन्हें एक वर्ष के लिए भेज दिया।”
“माँ! हम अगले साल अपने घर में गणेश जी की स्थापना करेंगे और उन्हें अपने ही घर में रखेंगे। गणेश विसर्जन वाले दिन अपने दोषों का विसर्जन करने की शपथ लेंगे।”
“मेरा राजा बेटा कितना समझदार हो गया है, कहकर माँ ने रोहित को गले से लगा लिया।