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ग़म ऐ दिल…

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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हाय! क्यों,
ग़म मुझे छोड़ता नहीं है
मेरी खुशियों को मुझसे,
जोड़ता नहीं है।

ऊब सा गया हूँ,
तक़लीफों को सहते-सहते
मर न जाऊं कहीं,
भावनाओं में बहते-बहते,
मेरे ग़म ऐ दिल को कोई
समझता नहीं है।
हाय! क्यों…

घेर लिया है ग़मों ने मुझे,
कैसे अब जी पाऊंगा
तन्हाइयों के साए में,
तिल-तिल कर मर जाऊंगा
क्यों सोया हुआ भाग्य मेरा,
जगता नहीं है।
हाय! क्यों…

याद आने लगा है,
गुजरा हुआ एक-एक पल
कचोटने लगी है दिल को,
दर्द भरी एक ग़ज़ल
क्यों किया हुआ वादा कोई,
निभाता नहीं है।
हाय! क्यों…

डर-सा लगने लगा है,
अपनों की हरकतों स
रो रही है चमगादडें,
परकोटे के दरख्तों से
क्यों कर्मों के सामने कोई,
झुकता नहीं है।
हाय! क्यों…॥

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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