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गृहलक्ष्मी

डॉ.रीता जैन’रीता’
इंदौर(मध्यप्रदेश)

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एक अंकल को दोस्त के बेटे की शादी के समारोह में जाने का मौका मिला। स्टेज पर खड़ी ख़ूबसूरत नयी जोड़ी को आशीर्वाद देकर नीचे उतर ही रहे थे कि दोस्त ने आवाज देकर वापस स्टेज पर बुलाया और कहा कि-“नवदंपति को आशीर्वाद के साथ अच्छी शिक्षा देते जाओ।”
महानुभाव ने पर्स में से १०० रुपये का नोट निकालकर दूल्हे के हाथ में देते हुए कहा कि-“मसलकर नोट को फेंक दे।”.
दूल्हे ने कहा-“अंकल,ऐसी सलाह? पैसे को तो हम लक्ष्मी मानते हैं।”
महानुभाव ने जबाब में कहा कि-“जब कागज की लक्ष्मी का इतना मान-सम्मान करते हो,तो आज से तुम्हारे साथ खड़ी कंधे से कंधा मिलाकर पूरी जिंदगी दु:ख-सुख में साथ देने के लिए तैयार गृहलक्ष्मी को कितना मान सम्मान देना है,वो तुम खुद तय कर लेना,
क्योंकि,ये किसी माँ-बाप का सबसे अनमोल मोती है, जो इस कागज़ की लक्ष्मी से बहुत ऊपर है। ”

परिचय-डॉ.रीता जैन लेखन में उपनाम रीता लिखती हैं। ३१ जनवरी १९६६ को उज्जैन में जन्मीं हैं और वर्तमान में इंदौर में निवासरत हैं। मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से संबंध रखने वाली डॉ. जैन की शिक्षा-एम.फिल.(लेज़र), पीएचडी(प्राणीशास्त्र-प्रबंधन) तथा एमबीए(मानव संसाधन विकास )है। आप कार्यक्षेत्र में प्राचार्य(निजी महाविद्यालय,इंदौर)हैं। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत आप कई संगठनों से जुड़ीं हुई हैं। इनकी लेखन विधा-गीत एवं लेखन है। कई विज्ञान पत्र-पत्रिकाओं में आपके लेख प्रकाशित हुए हैं तो आकाशवाणी इंदौर से विज्ञान वार्ता, कविता एवं परिचर्चा प्रसारण सहित सामाजिक पत्रिकाओं में कविताएं प्रकाशित हुई हैं। रीता जी को २००९ में शिक्षा के क्षेत्र में इंदौर नायिका अवार्ड सम्मान,खेल के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा २ सितारा प्रावीण्य प्रमाण-पत्र सहित टेबल टेनिस में राज्य तक विजेता प्रमाण-पत्र,निर्मला पाठक अवार्ड और युगल गरबा प्रतियोगिता में प्रथम आने पर कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया है। आप ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-जन्तु जीवाश्म पर शोध कार्य है,जिससे प्रभावित होकर लंदन के जीवाश्म विज्ञानी डॉ.एंड्रू स्मिथ ने निवास पर आकर काम को बहुत सराहा है। निवास पर ही जीवाश्म संग्रहालय भी बनाया है,जिसे देखने-अध्ययन करने सभी विद्यार्थी(निःशुल्क) आते हैं। लेखनी का उद्देश्य-एक ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं,और प्रेरित भी होते हैं। इनके लिए प्रेरणा पुंज डॉ.पूर्णिमा मंडलोई हैं। विशेषज्ञता-विज्ञान एवं प्रबंधन में है,तो रुचि-लेखन,संगीत,पढ़ना तथा भ्रमण में है।