कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,
हैदराबाद (तेलंगाना)
***************************************************
मौन संघर्ष, हाथों में छाले, सम्मान कब ? (मजदूर दिवस विशेष)….
धूप जली, तन जला, फिर भी चला — वो चला,
राह कठिन, पग थके, मन न डरा — वो चला।
हाथों में छाले लिए, स्वप्न पाले लिए,
दर्द छिपा, हँस पड़ा, अश्रु टाले लिए।
ईंट पर ईंट रख, जग सँवारा सदा,
खुद रहा छाँव बिन, धूप ही में खड़ा।
भूख ने जब डसा, मौन ही वह रहा,
पीर को पी गया, कुछ न जग से कहा।
श्रम की हर एक लकीर, कथा कह गई,
रात की नीरवता, वेदना सह गई।
क्यों नहीं मान उसे, जो रचता नगर ?
क्यों नहीं ध्यान उसे, जो बनता अधर ?
स्वेद से सींचकर, स्वप्न बोता रहा,
पर स्वयं वंचितों-सा ही रोता रहा।
अब समय आ गया, स्वर उठाना पड़े,
मौन को तोड़कर, हक़ दिलाना पड़े।
सम्मान उसका भी, जग में गूँजे सदा,
श्रम का हो उत्सव, हर घड़ी, हर सदा।
छाले इन हाथों के, गान बन जाएंगे,
मौन ये संघर्ष भी, मान बन जाएंगे॥
परिचय – कवि व अनुवादक कमलेकर नागेश्वर राव का साहित्यिक उपनाम ‘कमल’ है। आप सरकारी अध्यापक (हिंदी) ने रूप में जिला नागर कर्नूल के वेल्दंडा में कार्यरत हैं। तेलंगाना राज्य के रंगा रेड्डी जिले में निवासरत ‘कमल’ की तेलुगू और हिंदी के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में कविताएँ व विशेष आलेख प्रकाशित होते रहते हैं। इनको श्री श्री कला वेदिका राजमंड्री वालों से ‘साहिती मित्रा’ पुरस्कार, आदित्य संस्कृति (मप्र) से ‘हिंदी सेवी’ तथा डाॅ.सीता किशोर खरे स्मारक साहित्य पुरस्कार आदि मिले हैं।