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छिपा लेते तो अच्छा होता…

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’
बीकानेर (राजस्थान)
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तुम छिपा लेते अपना गुमान,तो अच्छा होता।
तुम काबू में रख लेते जुबान,तो अच्छा होता।

झुकी हुई ये आँख तुम्हारी यूँ कभी न शर्माती,
गर कर लेते सभी का सम्मान,तो अच्छा होता।

शर्मसार कर दिया जहां में सभी को तुमने यार,
बचा लेते अगर बची हुई शान,तो अच्छा होता।

इक फैसले से तेरे,कितनी गई थी जानें राजन,
किए पर अपने होते पशेमान,तो अच्छा होता।

गरीब का छीन निवाला,दे रसूखदार को दिया,
जरा-सा उन्हें भी देते अनुदान,तो अच्छा होता।

मर गए जो देख ना पाऐ तेरा ये फ़रमान ‘जैदि’,
काश पहले देते उनको मुस्कान,तो अच्छा होता॥

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