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जिन्दगी का सफर

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’
अलवर(राजस्थान)
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लहू बनाम जिन्दगी….

मैंने जिंदगी को,
लहू से सींचा है
बड़ी मुश्किल से,
यहां तक खींचा है।
मैंने जिन्दगी…

कितने ही रंग देखे हैं,
लहू के इस सफर में
शायद मुर्दे भी रोए हैं,
छुप-छुप कब्र में
इसीलिए सच्चाई का,
दामन भीगा है।
मैंने जिन्दगी…

अपनों पर सितम,
गैरों पर करते हैं कर्म
लोगों का तो बस,
यही है एक धर्म
हमने तो ईमान से,
जीना सीखा है।
मैंने जिन्दगी…

हो भ्रष्टाचार हमें ये,
मंजूर नहीं
दिल किसी का दुखे,
ये दस्तूर नहीं
ईमानदारी का ही,
ये नतीजा है।
मैंने जिन्दगी…

सात समंदर पार से,
निकल बाहर आऊंगा
दुश्मनों से लडने को,
मैं हुंकार भरुंगा।
अपने पूर्वजों से मैंने,
ये सब सीखा है॥
मैंने जिन्दगी…

परिचय- ताराचंद वर्मा का निवास अलवर (राजस्थान) में है। साहित्यिक क्षेत्र में ‘डाबला’ उपनाम से प्रसिद्ध श्री वर्मा पेशे से शिक्षक हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कहानी,कविताएं एवं आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। आप सतत लेखन में सक्रिय हैं।

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