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जीवन एक संगीत

संजय सिंह ‘चन्दन’
धनबाद (झारखंड )
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सुर-ताल गीत-संगीत,
झंकृत हो अविरल प्रीत
पक्षी-पौधे, जीव-जंतु,
सब सुनते गीत-संगीत।

कोयल की मधुर कुहू सा गीत,
तोते के भी शब्द निकलते
जैसे मधुर मीठे हों नीत,
वन-जंगल में मयूर नृत्य कर
लच-लच करे शरीर,
संगीत से इतना भाव अधीर।

जो करे संगीत की साधना,
हों प्रसन्न प्रभु आराधना
सुर साधक, लय धुन मीत,
महक, बहक, ललक संगीत
यह खुशियों-सा प्रतीत,
मस्त रखते हैं गीत-संगीत
बसे है उसमें जश्ने रीत,
प्रेमी विश्व को ये संगीत।

गाते सब अपना-अपना गीत,
जगे मस्तिष्क में शीतल प्रीत
कराए महसूस एकांकी मीत,
बजे जब मेज थाप संगीत
मृदंग, तबला से धम्म संगीत,
हार्मोनियम से ताल सुर में गीत
शहनाई की धुन में अद्भुत प्रीत।

ऐसी है विश्व संगीत की रीत,
गाओ खुलकर अपना भी गीत
सुनाओ भीड़ में भी संगीत,
मची है होड़ दिवस संगीत
सुनो दुनिया के सारे गीत।

सुना दो भारत की यह रीत,
बसे हृदय में गीत-संगीत,
दिवस यह विश्व में हो संगीत,
है जीवन एक संगीत
जगाए सबके मन में प्रीत।
दुनिया के दिल को लेता जीत,
वाह भाई, वाह-वाह संगीत॥

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