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जीवन नहीं मिलेगा दुबारा

दिनेश चन्द्र प्रसाद ‘दीनेश’
कलकत्ता (पश्चिम बंगाल)
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ये जीवन नहीं मिलेगा फिर से तुम्हें दुबारा,
हँस-हँस कर लो तुम आज गुजारा।

न किसी से बैर रखो, न किसी से दुश्मनी,
सबका अपना भोग है, सबको अपनी करनी
कटु वचन न बोलो किसी को, सबका बनो प्यारा,
ये जीवन नहीं मिलेगा फिर से तुम्हें दुबारा…।

धन-दौलत सब यहीं रहेगा, रह जाएगा कोठा अटारी,
फिर किस चीज के लिए करते हो तुम मारा-मारी
कोई किसी का नहीं, नश्वर है ये संसारा,
ये जीवन फिर से नहीं मिलेगा तुम्हें दुबारा…।

रिश्ते-नाते सब मतलब के हैं, मतलब का है प्यार,
होगा जब तक स्वार्थ, पूर्ण बने रहेंगे सब तेरे यार
जिस दिन मतलब पूरा हो, दूर हो जाए सारा,
ये जीवन मिलेगा नहीं फिर से तुम्हें दुबारा…।

जो भी मिले प्रेम से, खा लो मस्ती में जी लो,
खुशियाँ बांटो औरों को, गम खुद तुम ले लो
समझ सके तो समझो, अपना ही है जग सारा,
ये जीवन नहीं मिलेगा फिर से तुम्हें दुबारा…।

नफरत को इस जहां से मिटा दो, काम करो अच्छे,
प्रभु के तुम बंदे हो, रहो सदा ही सच्चे-सच्चे
आया है सो जाएगा, राजा रंक और फकीरा,
ये जीवन नहीं मिलेगा फिर से तुम्हें दुबारा…।

करना नहीं अभिमान किसी का, जाना खाली हाथ,
तेरे अच्छे-बुरे कर्म ही जाएंगे सदा तेरे ही साथ
प्रेम करो प्रेम से रहो, बनो सबका तुम दुलारा,
ये जीवन नहीं मिलेगा फिर से तुम्हें दुबारा…।

नेकी करो और दरिया में डालो,
जीतना हो परोपकार कर डालो।
भूखे का पेट भरो, किसी नंगे कथक दो बदन सारा,
ये जीवन नहीं मिलेगा फिर से तुम्हें दुबारा…॥

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