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तुम्हारे हृदय से

पूनम दुबे
सरगुजा(छत्तीसगढ़) 
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अपना सुर तुमसे मिलाकर
गीत बनाया शब्द सजाकर,
गूंज उठे उपवन गुलशन
होंठों पर इक लय गुनगुनाकर।
अपना…

सुगंध से महक गई बगिया
फूलों पर आ गई तितलियां,
लेने लगी वो भी अंगड़ाईयां
दूर हुई सबकी तन्हाईयां।
अपना सुर…

जबसे तुम्हारा सहारा हुआ
हर पल समझो हमारा हुआ,
दिल के अंदर फैला प्रकाश,
नई सुबह की नई भरी आश।
अपना सुर…

तुमसे मिलकर जाना ये प्यार
अपना सुर तुमसे मिलाकर,
गीत बनाया शब्द सजाकर
पलकों पर सपने सजाकर।
अपना…तुमसे मिलाकर॥

परिचय-श्रीमती पूनम दुबे का बसेरा अम्बिकापुर,सरगुजा(छत्तीसगढ़)में है। गहमर जिला गाजीपुर(उत्तरप्रदेश)में ३० जनवरी को जन्मीं और मूल निवास-अम्बिकापुर में हीं है। आपकी शिक्षा-स्नातकोत्तर और संगीत विशारद है। साहित्य में उपलब्धियाँ देखें तो-हिन्दी सागर सम्मान (सम्मान पत्र),श्रेष्ठ बुलबुल सम्मान,महामना नवोदित साहित्य सृजन रचनाकार सम्मान( सरगुजा),काव्य मित्र सम्मान (अम्बिकापुर ) प्रमुख है। इसके अतिरिक्त सम्मेलन-संगोष्ठी आदि में सक्रिय सहभागिता के लिए कई सम्मान-पत्र मिले हैं।