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तो क्या कीजे…

बबीता प्रजापति 
झाँसी (उत्तरप्रदेश)
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कोई दिल दुखाए,
तो क्या कीजे
दिल के एहसास समझ न पाए,
तो क्या कीजे।

जुर्म बड़ा है,
गलतियां बताने का
किसी को समझ न आए,
तो क्या कीजे।

गिरने लगी है चाहत की दीवारें,
आने लगी है इश्क़ में भी दरारें।
शीशे के जज़्बात जब,
टूट के बिखर जाएं
तो क्या कीजे…॥