थामा हमेशा

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मयंक वर्मा ‘निमिशाम्’ 
गाजियाबाद(उत्तर प्रदेश)

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मेरे कदमों को लड़खड़ाने दिया,
पर थामा हमेशा, न गिरने दिया
मेरी मनमानियों को दबाया कभी,
कभी उम्मीद के परों से उड़ने दिया।

धूप-छाँव में अकेले चलने दिया,
पर अपना साया साथ रहने दिया
“चलो उठो, सब ठीक है” कहकर,
चोटों के दर्द को सहने दिया।

जोश-ए-जुनूँ को बढ़ने दिया,
पर उसको न कभी सर चढ़ने दिया।
मेरी गलतियों पर डांटा भी बहुत,
मगर औरों को कुछ न कहने दिया।

ख़ुद की नई राह बनाने दिया,
जो चाहा मुझे वो करने दिया
खर्चों की किताबें भरती ही रहीं,
पर पैसों को मुझ पर बहने दिया।

माँ की ममता को दिखने दिया,
अपने एहसासों को छुपा रहने दिया।
कैसे करूं मैं शुक्रिया अदा उसका,
इन बीते सालों में, जो भी आपने दिया॥

परिचय-मयंक वर्मा का वर्तमान निवास नई दिल्ली स्थित वायुसेना बाद (तुगलकाबाद)एवं स्थाई पता मुरादनगर,(ज़िला-गाजियाबाद,उत्तर प्रदेश)है। उपनाम ‘निमिशाम्’ है। १० दिसम्बर १९७९ को मेरठ में आपका जन्म हुआ है। हिंदी व अंग्रेज़ी भाषा जानने वाले श्री वर्मा ने बी. टेक. की शिक्षा प्राप्त की है। नई दिल्ली प्रदेश के मयंक वर्मा का कार्यक्षेत्र-नौकरी(सरकारी) है। इनकी लेखन विधा-कविता है। लेखनी का उद्देश्य-मन के भावों की अभिव्यक्ति है। पसंदीदा हिंदी लेखक व प्रेरणापुंज डॉ. पूजा अलापुरिया(महाराष्ट्र)हैं।

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