कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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जन मन का भाव हिन्दी (हिन्दी दिवस विशेष)….
हिंदी हमारी, हम हिंदी की संतान,
हिंदुस्तान की हिंदी को देश में फैलाएंगे।
जन-जन के दिल में बसती,
देश की धड़कन है हिंदी।
दुनिया में हिंदी फैलाएंगे,
हिंदी को पहचान दिलाएंगे।
सपनों में हिंदी के स्वर गूँजेंगे,
मानव मेहनत के सपनों के गीत हिंदी बनेंगे।
कल्पना में हिंदी, चेतना की हर लय में,
मशाल हिंदी, समय की पुकार है हिंदी।
बच्चों को सिखाएंगे हिंदी,
कविताओं में सोचेंगे हिंदी।
हिंदी हर मन में पौधा बन बढ़ाएंगे।
त्योहार बन हिन्दी गुनगुनाएंगे।
स्वप्न बन स्वर्ग से आएगी हिंदी,
सूरज बन सोना बरसाएगी हिंदी।
हिंदी रंग बदल गीत-ग़ज़ल में,
हिंदुस्तान में छाएगी मेरी हिन्दी।
संसार में हिंदी छा जाएगी,
हिंदी है मन मेरा, अभिमान मेरा, सम्मान मेरा।
जन-जन तक पहुँचाएंगे हिंदी,
हिंदी है हिंदुस्तान का गाना॥