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देख लो दिल में

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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क्यूँ बेमौसम की बर्फ जमा ली है दिल में
थोड़ा सा खिसका दो रंज, देख लो दिल में।

दे दो अब भी धूप और रोशनी को न्योता,
नई सुबह भी अपनी लगेगी, देख लो दिल में।

तुम नाहक ही चिढ़े हो, चढ़े हो सूरज-सा,
महक उठेंगे फिर से रिश्ते, देख लो दिल में।

भुला दो अब तो दर्द की सीढ़ियाँ, क्या मिलेगा,
मत तोड़ो उम्मीदों के घोंसले, देख लो दिल में।

वक्त़ तो मेरा भी कभी आएगा, देखना तुम,
बस साथ चलो मुहब्बत से, देख लो दिल में॥

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