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देश की खातिर…

शरद जोशी ‘शलभ’
धार (मध्यप्रदेश)

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देश की खा़तिर जिएँ हम,देश की ख़ातिर मरें,
देश का गौरव बढे़ सब,काम हम ऐसे करें।

आपसी मतभेद सारे,जो भी हैं हम भूल जाएँ,
एक होकर हम सभी,इस राष्ट्र के ही गीत गाएँ।
एकता हो देश में सब,काम हम ऐसे करें,
देश की ख़ातिर…॥

जाति का अभिमान हो नहीं,रंग का नहीं भेद हो,
एकता की नाव में नहीं छोटा-सा भी छेद हो।
नाम ऊँचा देश का हो,काम सब ऐसे करें,
देश की ख़ातिर…॥

धर्मान्धता के जोश में,अधर्म हम से हो न जाए,
इन्सानियत पर दाग़ अपने हाथ से लगने न पाए।
कर्म ही निज धर्म हो,सब काम हम ऐसे करें,
देश की ख़ातिर…॥

हो सदा सहयोग ही इन्सान से इन्सान का,
ध्यान तो हो मात्र मानव धर्म और ईमान का।
राष्ट्र का उत्थान हो सब,काम हम ऐसे करें,
देश की ख़ातिर…॥

जूझना है आपदाओं से सदा मिलकर हमें,
संघर्ष पथ पर अग्रसर हों,पाँव न अपने थमें।
कल्याण सबका हो ‘शलभ’ सब काम हम ऐसे करें।
देश की ख़ातिर…जिएँ हम,देश की ख़ातिर मरें॥

परिचय-शरद जोशी की पहचान कवि एवंं गीतकार के रूप में है। इनका उपनाम ‘शलभ’ है। ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की नगरी जिला धार (म.प्र.)में आपका बसेरा है। यहां आप साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष हैं। लेखन विधा- कविता,गीत,ग़ज़ल है। विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं द्वारा वाणी भूषण,साहित्य सौरभ, साहित्य शिरोमणि तथा साहित्य गौरव सम्मान से आपको सम्मानित किया गया है। इंदौर और धार में कई साहित्यिक संस्थानों के सदस्य श्री जोशी का कार्यक्षेत्र अध्यापन(सेवानिवृत्त शिक्षक)का रहा है। वर्तमान में साहित्य सेवा में निरंतर सक्रिय हैं।