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धरती माँ की रक्षा अनिवार्य

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’
गोरखपुर(उत्तरप्रदेश)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


आज सारी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग जैसी अंतरराष्ट्रीय समस्या से जूझ रही है,यद्यपि कई देशों की सरकारों द्वारा कई कदम उठाए गए हैं फिर भी आज दिनों-दिन पर्यावरणीय ह्रास, वायु तथा जल प्रदूषण में बढ़ोतरी,ओजोन परत में कमी,औद्योगिकरण,वन कटाई इत्यादि से तेलों का फैल जाना,पावर प्लांट,कीटनाशक का उत्पादन एवं इस्तेमाल इत्यादि कई ऐसे कारक हैं जो ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा दे रहे हैं।
अपनी धरती की प्राकृतिक संपत्ति को बचाने के लिए ही २२ अप्रैल १९७० से बेहद उत्साह के साथ लगभग १४१ देश मिलकर यह दिवस मनाते हैं। इस दिन पारिस्थितिकी को बढ़ावा देने तथा भूमि प्रदूषण की बढ़ती समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्वभर में कई प्रकार के कार्यक्रम होते हैं। अमेरिका में तो कुछ लोग फूल-पौधे या कीड़े लगे हुए कपड़ों से सजे हुए एक परेड में भाग लेते हुए पृथ्वी दिवस मनाते हैं कि देखो पूरा पर्यावरण हमारा घर है। २२ अप्रैल को पृथ्वी दिवस उत्सव की तारीख की स्थापना करने के अच्छे कार्य में भागीदारी के लिये अमेरिका के विस्कॉन्सिन सीनेटर गेलॉर्ड नेल्सन को स्वतंत्रता पुरस्कार के राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। जो
लोग इस कार्यक्रम को मनाने में भाग लेते हैं, जानवरों और पौधे के जीवन को इंगित करने के लिये हरे-नीले रंग का इस्तेमाल पृथ्वी ग्रह को बनाने में करते हैं। इसमें ग्रीन हाउस प्रभाव सहित ग्लोबल वार्मिंग को शामिल किए हुए अपने प्राकृतिक पुनर्चक्रण का प्रतीक होता है।
आज भी प्लास्टिक सबसे बड़ी समस्या है, जिसके कारण यह भूमि की उर्वरक क्षमता को खत्म कर रही है। साथ ही भूजल को भी दूषित कर रही है। इसको जलाने पर निकलने वाला धुआं ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचाता है, जो वैश्विक तपन(ग्लोबल वार्मिंग) का मुख्य कारण है। इस समय विश्व में हर साल प्लास्टिक का उत्पादन १० करोड़ टन के लगभग है और इसमें हर साल ४ प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है। भारत में हर साल लगभग ५०० मीट्रिक टन पॉलिथीन का निर्माण होता है, लेकिन इसकी १ प्रतिशत से भी कम
रिसाइक्लिंग हो पाती है। देश में हर साल लाखों पशु-पक्षी प्लास्टिक के कचरे से मर जाते हैं।
शहरवासी व प्रशासन पृथ्वी संरक्षित करने को लेकर बेपरवाह ही रहते हैं। सामाजिक रूप से भी जागरूकता फैलाने को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते। यहां तक कि,पृथ्वी दिवस को मनाने के लिए हर साल एक थीम तय किया जाता है और इसी को आधार बनाकर लोगों को जागरूक किया जाता है। जैसे २०१८ की थीम थी, ‘प्लास्टिक प्रदूषण का अंत’ …लेकिन जिस तरह बिना रोक-टोक के प्लास्टिक का प्रयोग लोगों द्वारा किया जा रहा है,उससे नहीं लगता कि प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने में सफलता इतनी जल्दी मिल सकती है।
पृथ्वी दिवस को सही मायने में मनाने के लिए अपने परिवार के साथ कुछ बाहरी गतिविधियों में शामिल होना होगा,जैसे पेड़ पर पक्षी के लिये घोंसला बनाना और पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका के बारे में चर्चा करना आवश्यक है। भूमि और जल प्रदूषण को टालने के लिये प्लास्टिक थैलों के इस्तेमाल में कमी लाने के लिये लोगों को प्रोत्साहित करना,पुराने सामानों का पुनर्चक्रण और दुबारा प्रयोग करने के बारे में अपने बच्चों को सिखाना चाहिए।
जरुरी स्थानों पर पौधरोपण करना,मनोरंजन गतिविधियों में भाग लेना,जैसे गीत गायन जो पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित हो और इस उत्सव में शामिल होने के लिये अधिक से अधिक व्यक्तियों को आकर्षित करना होगा।
सड़क,पार्क और दूसरी जगहों से गंदगी हटाने में,पर्यावरणीय रंगों को दिखाने के लिये हरे,भूरे या नीले रंग के कपड़े पहनकर लोगों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
शैक्षणिक सत्रों,जैसे-सेमिनार,परिचर्चा और दूसरे प्रतियोगी क्रियाकलाप जो धरती के प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा से संबंधित हों,में भाग लेकर लोगों को शिक्षा दें कि हर दिन पृथ्वी दिवस है,इसलिये हर दिन उन्हें धरती का ध्यान रखना चाहिये।
विभिन्न व्यवहारिक संसाधनों द्वारा ऊर्जा संरक्षण के लिये लोगों को बढ़ावा भी देना होगा। रविंद्रनाथ टैगोर ने पृथ्वी दिवस के बारे में कहा है कि, -“बोलते हुए स्वर्ग से बात करने के लिए पेड़ पृथ्वी का अंतहीन प्रयास है।”
हम भारतवासी धरती को माँ का दर्जा देते हैं , उसकी पूजा करते हैं,इसलिए हमें तन मन धन से पृथ्वी दिवस अभियान मे भाग लेकर इसे सफल बनाना है,ताकि हमारी माँ पर कोई आँच न आए।

परिचय-आरती सिंह का साहित्यिक उपनाम-प्रियदर्शिनी हैl १५ फरवरी १९८१ को मुजफ्फरपुर में जन्मीं हैंl वर्तमान में गोरखपुर(उ.प्र.) में निवास है,तथा स्थाई पता भी यही हैl  आपको हिन्दी भाषा का ज्ञान हैl इनकी पूर्ण शिक्षा-स्नातकोत्तर(हिंदी) एवं रचनात्मक लेखन में डिप्लोमा हैl कार्यक्षेत्र-गृहिणी का हैl आरती सिंह की लेखन विधा-कहानी एवं निबंध हैl विविध प्रादेशिक-राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कलम को स्थान मिला हैl प्रियदर्शिनी को `आनलाईन कविजयी सम्मेलन` में पुरस्कार प्राप्त हुआ है तो कहानी प्रतियोगिता में कहानी `सुनहरे पल` तथा `अपनी सौतन` के लिए सांत्वना पुरस्कार सहित `फैन आफ द मंथ`,`कथा गौरव` तथा `काव्य रश्मि` का सम्मान भी पाया है। आप ब्लॉग पर भी अपनी भावना प्रदर्शित करती हैंl इनकी लेखनी का उद्देश्य-आत्मिक संतुष्टि एवं अपनी रचनाओं के माध्यम से महिलाओं का हौंसला बढ़ाना हैl आपके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचंद एवं महादेवी वर्मा हैंl