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नार्वे और भारत के मध्य संबंधों में हिंदी की अहम भूमिका-डॉ. शुक्ल

इंदौर (मप्र)।

नार्वे में भारत की भाषा हिंदी और यहाँ की संस्कृति को सम्मान दिया जाता है। दोनों देशों की संस्कृतियों को जोड़ने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
यह कथन है डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल का, जो मूलतः लखनऊ के हैं और पिछले ४५ वर्ष से ओस्लो में हिंदी के साथ भारतीय संस्कृति की अलख जगाए हुए हैं। पहली बार इंदौर आए डॉ. शुक्ल ने श्री मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति में गांधी जी द्वारा किया गया शिलान्यास, समिति भवन आदि का अवलोकन किया और बहुत प्रसन्न हुए। डॉ. शुक्ल का डॉ. वसुधा गाडगिल तथा अंतरा करवड़े ने साक्षात्कार लिया। इस अवसर पर समिति की ओर से प्रचार मंत्री अरविंद ओझा, अनिल भोजे, राजेश शर्मा तथा घनश्याम यादव ने एवं हिंदी परिवार इंदौर की ओर से सदाशिव कौतुक, प्रभु त्रिवेदी, संतोष मोहंती आदि ने भी स्वागत-सम्मान किया। वीणा विभाग की ओर से विशेष अंक दिए गए। श्री शुक्ल ने अभिभूत होकर सभी का आभार व्यक्त किया। संचालन हरेराम वाजपेयी ने किया। आभार प्रदीप ‘नवीन’ ने व्यक्त किया।