कुल पृष्ठ दर्शन : 345

You are currently viewing नौ रूपों की वंदना

नौ रूपों की वंदना

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला(मध्यप्रदेश)
*******************************************

माता के नौ रंग (नवरात्रि विशेष)….

तम को हरने वाली माता,आज उजाला कर दे।
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे॥

नौ रूपों में तू तो माता,आशीषें ले आती,
सुख-वैभव देकर भक्तों को,दुक्ख सभी ले जाती।
भटक रहे जो फुटपाथों पर,उनको अब तू घर दे,
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे…॥

कन्याओं सँग है हैवानी,अपनी तेग चलाओ,
तुमने तो नित दानव मारे,निज आवेग बताओ।
मैं तो युग-युग से हूँ पीड़ित,मुझको अपना दर दे,
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे…॥

झूठों की महफिल जमती है,मक्कारों की चाँदी,
बनकर आओ माता तूफाँ,बन जाओ तुम आँधी।
चलूँ सदा मैं सत्यमार्ग पर,ऐसा आज असर दे,
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे…॥

नौ रूपों में तू तो माता,नूर सदा बरसाती,
रणचण्डी जब तू बन जाती,दुनिया है थर्राती।
असुर दुष्ट,पापी,अन्यायी,सबको आज कहर दे,
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे…॥

अँखियों में अँसुअन का डेरा,पीड़ा ने घेरा है,
सदा अभावों के हमले हैं,कष्टों का डेरा है।
तृषाग्रसित हो भक्त भटकते,शीतल नीर नहर दे,
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे…॥

मेरी वाणी मधुर-सरस हो,ऐसा तू उपहार दे,
मैं सच्चा मानव बन पाऊँ,ऐसा तू संसार दे।
गीत,ग़ज़ल सब दिल में उतरें,ऐसी आज बहर दे,
धर्म,नीति में जो हैं रहते,उनको अब तू वर दे…॥

परिचय–प्रो.(डॉ.)शरद नारायण खरे का वर्तमान बसेरा मंडला(मप्र) में है,जबकि स्थायी निवास ज़िला-अशोक नगर में हैL आपका जन्म १९६१ में २५ सितम्बर को ग्राम प्राणपुर(चन्देरी,ज़िला-अशोक नगर, मप्र)में हुआ हैL एम.ए.(इतिहास,प्रावीण्यताधारी), एल-एल.बी सहित पी-एच.डी.(इतिहास)तक शिक्षित डॉ. खरे शासकीय सेवा (प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष)में हैंL करीब चार दशकों में देश के पांच सौ से अधिक प्रकाशनों व विशेषांकों में दस हज़ार से अधिक रचनाएं प्रकाशित हुई हैंL गद्य-पद्य में कुल १७ कृतियां आपके खाते में हैंL साहित्यिक गतिविधि देखें तो आपकी रचनाओं का रेडियो(३८ बार), भोपाल दूरदर्शन (६ बार)सहित कई टी.वी. चैनल से प्रसारण हुआ है। ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं(विशेषांकों)का सम्पादन कर चुके डॉ. खरे सुपरिचित मंचीय हास्य-व्यंग्य  कवि तथा संयोजक,संचालक के साथ ही शोध निदेशक,विषय विशेषज्ञ और कई महाविद्यालयों में अध्ययन मंडल के सदस्य रहे हैं। आप एम.ए. की पुस्तकों के लेखक के साथ ही १२५ से अधिक कृतियों में प्राक्कथन -भूमिका का लेखन तथा २५० से अधिक कृतियों की समीक्षा का लेखन कर चुके हैंL  राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में १५० से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति एवं सम्मेलनों-समारोहों में ३०० से ज्यादा व्याख्यान आदि भी आपके नाम है। सम्मान-अलंकरण-प्रशस्ति पत्र के निमित्त लगभग सभी राज्यों में ६०० से अधिक सारस्वत सम्मान-अवार्ड-अभिनंदन आपकी उपलब्धि है,जिसमें प्रमुख म.प्र. साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी पुरस्कार(निबंध-५१० ००)है।

Leave a Reply