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पुरुषार्थ छिपा है राष्ट्रप्रेम का

हेमराज ठाकुर
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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अपना सम्मान तिरंगा…

राष्ट्रधर्म का गौरव प्यारा, आज हम हैं देखो बढ़ाने चले,
आजादी का प्रतीक तिरंगा, आज घर-घर में हैं फहराने चले।

उत्तुंग शिखर हिमालय से लेकर, हिन्द महासागर तक फैला है,
अरुणाचल से गुजरात कच्छ तक, यह भारत देश ही छैला है।

दसों दिशाएं आलोकित जिसकी, है वीरता जिसके जर्रे-जर्रे में,
पुरुषार्थ छिपा है राष्ट्रप्रेम का, यहां जीवन याप के हर ढर्रे में।

तिरंगा है यह खिलौना नहीं, हर रंग का लहदा भाव निराला है,
शौर्य, वीरता, शान्ति, समृद्धि, मध्य चक्र प्रतीक समय का डाला है।

वीर बलिदानियों की कुर्बानी की कहानी, तिरंगा याद दिलाता है,
इतिहास पढ़ा देता है वह बंदा, जो घर-घर तिरंगा फहराता है।

आजादी के दीवानों ने प्रणाहुतियों से, यज्ञ को सफल बनाया था,
गुलामी की बेडौल जंजीरों से, भारत को आजाद कराया था,

इसे संभालना, जश्न मनाना, अब तो हमारे ही हिस्से में आया है,
मिल-जुल कर देश को बढ़ाने का, गुर पुरखों ने हमें सिखाया है।

आजादी के अमृत महोत्सव की, पावन बेला भारत में आई है,
बच्चे से बूढ़े, अमीर-गरीब ने, यह बेला सबने ही तो मनाई है॥