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पृथ्वी के मुख पर कालिख़

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार
अहमदाबाद (गुजरात ) 
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


जब मैं जन्मी,
पूरी की पूरी पृथ्वी
मेरे इर्द-गिर्द थी,
पहाडों से फूटते झरने
सरसराते पेड़ों से लिपटी लताएँ,
खिलखिलाते अनगिनत फूल
घनघोर बरसती हुई बारिश और हवा ने,
मेरी नन्हीं-नन्हीं हथेलियों को चूम लियाl

बचपन की हर सुबह,
मैदानों में होती थी
दौड़ते झुंडों में
मोहल्ले के सब बच्चे,
बारिश से बिछे हरे-हरे गलीचों में
लोट-पोट होते,
तब नहीं था मच्छरों से भय
और न आदमी से,
धूप में सिकती देह देर तलक
तब नहीं था सौंदर्य से इतना मोह इन्सान को,
तब तो बस पृथ्वी थी सौंदर्यमयी
ओक-ओक भर पीता था इंसान,
घूँट-घूँट भर जीता था
पहले मैदान गायब हुए साज़िश के तहत,
फिर लड़कियाँ और बच्चे
वक्त-बे-वक्त बरसात आई,
आये पृथ्वी के उदर से बाहर
भूकम्प,आँधियाँ
पहाड़ धँसे,
मशीनों,यंत्रों ने पृथ्वी को भर दिया आग से
पुत गई पृथ्वी के मुख पर कालिख़,
कार्बन की चादर ओढ़े
मानो पूछ रही है पृथ्वी-
बताओ!
मेरा क्या है कसूर ?
मैंने वो सब दिया,
जो इंसान को चाहिए था जीने के लिए
पर मनुष्य ने क्या दिया मुझे ??

मैंने मनुष्य को अग्नि दी,
ताकि वह लड़े दु:ख के खिलाफ़
आज उस आग का कहीं पता नहीं है,
मैंने मनुष्य को वायु दी,
ताकि वह प्राण वायु की रक्षा कर सके
आज मनुष्य ने इतनी अशुद्ध कर दी है वायु,
उसमें घुटन है,स्वयं नाशवान हो रहा है
मैंने मनुष्य को जल दिया,
ताकि वह जिंदा रह सके
वही जल विष युक्त हो गया,
पृथ्वी की गायें
नदियों की मछलियाँ,
धरती के बछड़े
तरस रहे हैं बिन जल,
नदियाँ कर रही हैं हाहा-कार
बीमारी नित-नयी,
ले रहीं जन्म
पृथ्वी पर कहाँ है सुरक्षित मनुष्य!
धरती हुई बेघर,
इमारतों ने नींव डाली
किसान पुकार रहा है रोटी-रोटी,
गाँव-गाँव आत्महत्याएँ
धरती का हाल देख आकाश भी रोयाl

मनुष्य की तबाही देख
पृथ्वी हुई बार-बार दयावान,
फिर बारिश की
झड़ी लगाई है,
फिर बहाए दूध सरीखे झरने
धरती पर हरियाली बिछाई है,
मनुष्य की खातिर…ll

परिचयडाॅ.आशासिंह सिकरवार का निवास गुजरात राज्य के अहमदाबाद में है। जन्म १ मई १९७६ को अहमदाबाद में हुआ है। जालौन (उत्तर-प्रदेश)की मूल निवासी डॉ. सिकरवार की शिक्षा- एम.ए.,एम. फिल.(हिन्दी साहित्य)एवं पी.एच.-डी. 
है। आलोचनात्मक पुस्तकें-समकालीन कविता के परिप्रेक्ष्य में चंद्रकांत देवताले की कविताएँ,उदयप्रकाश की कविता और बारिश में भीगते बच्चे एवं आग कुछ नहीं बोलती (सभी २०१७) प्रकाशित हैं। आपको हिन्दी, गुजराती एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। आपकी कलम से गुजरात के वरिष्ठ साहित्यकार रघुवीर चौधरी के उपन्यास ‘विजय बाहुबली’ का हिन्दी अनुवाद शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। प्रेरणापुंज-बाबा रामदरश मिश्र, गुरूदेव रघुवीर चौधरी,गुरूदेव श्रीराम त्रिपाठी,गुरूमाता रंजना अरगड़े तथा गुरूदेव भगवानदास जैन हैं। आशा जी की लेखनी का उद्देश्य-समकालीन काव्य जगत में अपना योगदान एवं साहित्य को समृद्ध करने हेतु बहुमुखी लेखनी द्वारा समाज को सुन्दर एवं सुखमय बनाकर कमजोर वर्ग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और मूल संवेदना को अभिव्यक्त करना है। लेखन विधा-कविता,कहानी,ग़ज़ल,समीक्षा लेख, शोध-पत्र है। आपकी रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित और आकाशवाणी से भी प्रसारित हैं। काव्य संकलन में आपके नाम-झरना निर्झर देवसुधा,गंगोत्री,मन की आवाज, गंगाजल,कवलनयन,कुंदनकलश,
अनुसंधान,शुभप्रभात,कलमधारा,प्रथम कावेरी इत्यादि हैं। सम्मान एवं पुरस्कार में आपको-भारतीय राष्ट्र रत्न गौरव पुरस्कार(पुणे),किशोरकावरा पुरस्कार (अहमदाबाद),अम्बाशंकर नागर पुरस्कार(अहमदाबाद),महादेवी वर्मा सम्मान(उत्तराखंड)और देवसुधा रत्न अलंकरण (उत्तराखंड)सहित देशभर से अनेक सम्मान मिले हैं। पसंदीदा लेख़क-अनामिका जी, कात्यायनी जी,कृष्णा सोबती,चित्रा मुदगल,मृदुला गर्ग,उदय प्रकाश, चंद्रकांत देवताले और रामदरश मिश्र आदि हैं। आपकी सम्प्रति-स्वतंत्र लेखन है।