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पोस्ट कार्ड अभियान के लिए हिंदीभाषा.कॉम को मिला ओएमजी राष्ट्रीय कीर्तिमान

इंदौर (मप्र)।

हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में हिंदीभाषा डॉट कॉम द्वारा केन्द्र सरकार को पोस्ट कार्ड (४०००) लिखने के अभियान को ओएमजी राष्ट्रीय कीर्तिमान सम्मान मिला है। महाराष्ट्र से संस्था ने सम्मान-पत्र और पदक द्वारा इस कार्य को प्रशंसित करके ओह माय गॉड बुक ऑफ रिकार्ड्स २०२२ में भी शामिल किया है।
सह सम्पादक श्रीमती अर्चना जैन (दिल्ली) ने बताया कि, यह हम सबके लिए बेहद हर्ष का विषय है कि, लोकप्रिय पोर्टल हिंदीभाषा डॉट कॉम को पहला कीर्तिमान (रिकार्ड) प्राप्त हुआ है। देशभर में शालेय विद्यार्थी, नवोदित और वरिष्ठ रचनाकारों को इस मंच तक लाकर हिंदी में मौलिक लेखन को अधिक से अधिक प्रसारित-प्रचारित करने में मंच द्वारा प्रारम्भ से अब कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। इंदौर से बेहद सीमित संसाधन और पारदर्शिता से संचालित इस मंच (वेबसाईट) मिला यह सम्मान सारे पाठकों और रचनाशिल्पियों का है। बहुत कम समय में ही हिंदी लेखन क्षेत्र में अपनी जगह बना चुका यह पोर्टल सबको मंच देने में १ मार्च २०१८ से भिड़ा हुआ है।
आपने बताया कि, मंच ने ‘अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता’ कहावत को उलटने की कोशिश यह कीर्तिमान पाकर सफलता में बदली है। मंच की सक्रियता के क्रम में जहाँ ढाई वर्ष वर्ष से सतत मासिक स्पर्धा जारी है,वहीं पोस्टकार्ड लिखने का अभियान अब अन्य राज्यों में भी शुरू हो गया है।
हिंदी को राजभाषा से अधिकृत राष्ट्रभाषा बनाने की दिशा में सक्रिय मंच के संस्थापक-सम्पादक अजय जैन ‘विकल्प’, संयोजक डॉ. सोनाली नरगुंदे, मार्गदर्शक डॉ.एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य'(महाराष्ट्र), प्रचार प्रमुख श्रीमती ममता तिवारी ‘ममता’ (छग) व सरंक्षक डॉ. अशोक जी (बिहार)के सामूहिक प्रयास से मंच ने सफलता का यह एक और सोपान सम्मान के रूप में प्राप्त किया है तो अब तक डेढ़ करोड़ दर्शकों-पाठकों का दुलार भी पा लिया है। पहले मंच को कनाडा से १ एवं भारत में अब तक ७ बड़े सम्मान मिले हैं।
सम्पादक श्री जैन के अनुसार कीर्तिमान से और हिम्मत मिली है, मातृभाषा व हिंदी साहित्य की सेवा का यह सिलसिला निरन्तर ऐसे ही जारी रहेगा। आपने इस सम्मान के लिए मुम्बई स्थित संस्था ओह माय गॉड बुक ऑफ रिकार्ड्स के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और सम्पादक प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता का आभार व्यक्त किया है, साथ ही माँ सरस्वती के आशीष से मिला कीर्तिमान सभी रचनाशिल्पियों को समर्पित किया है।

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