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पुस्तकों में जीवन का सार

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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पुस्तकों में लिखित ज्ञान जीवन का सम्पूर्ण सार होता है,
पुस्तक के लेखन में कई साहित्यकारों का अनुभव समाहित होता है।

पुस्तक ज्ञान है, आरम्भ और अंत है,
इतिहास है पुस्तक, काल समाज का दर्पण है।

दुनिया के भावी विकास का अंकुरण है पुस्तक,
बुद्धि का उत्कृष्ट स्रोत है, ज्ञान की गंगा है पुस्तक।

पुस्तक रचना सर्जन का अतुल बोध है,
पुस्तक समाज का चैतन्य रूप है।

पुस्तक मान सराबोर है, सांस्कृतिक धरोहर है,
पुस्तक प्रतीति की संज्ञा है।

पुस्तक ज्ञान की धारा अविरल बहाती है,
यह ऐतिहासिक और वर्तमान का सेतु है।

पुस्तकें करती है बातें बीते समय की,
संसार की, व्यक्ति विशेष की, आज की-कल की।

पुस्तकों में झरने गुनगुनाते हैं,
परियों की कहानियाँ सुनाते हैं।

जन-जन में जागृति लाए, ज्ञान वृद्धि बढ़ाए,
पुस्तकों की बातें सुनो ध्यान से, ये पुस्तक तुमसे बहुत कुछ कहना चाहें।

पुस्तक को तुमसे कुछ बातें करने का अरमान है,
जन-मन में जागृति लाए, भूत भविष्य, वर्तमान है।

अविरल बहती ज्ञान की धारा,
प्रतीति की संज्ञान है,
पुस्तक सांस्कृतिक और सामाजिक ऐतिहासिक धरोहर की शान है।

पुस्तकों की माँग भी समय के साथ-साथ कम हो गई,
ई-पुस्तकें ही अब सबकी पसंद हो गई हैं॥