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प्रणय मन की प्रतीक्षा करता है,कल की नहीं

‘प्रणय शतक’ काव्य लोकार्पित………………..
इन्दौर(मध्यप्रदेश)।

प्रणय मन की प्रतीक्षा करता है कल की नहीं,प्रेम अर्चना करता है। चंद्रभान भारद्वाज में नए दुष्यंत कुमार दिखाई देते हैं। मैं भारद्वाज की भाव,भाषा- शैली का प्रशंसक हूँ।
यह उदगार समिति के सभापति एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष सत्यनारायण सत्तन ने हिंदी साहित्य समिति द्वारा साहित्यकार चंद्रभान भारद्वाज की आठवीं कृति ‘प्रणय शतक’ के लोकार्पण अवसर पर व्यक्त किए। सारस्वत अतिथि समिति के प्रधान मंत्री सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी ने कहा कि,भारद्वाज का लेखन प्रशंसनीय है। कृति पर चर्चा करते हुए ‘वीणा’ के सम्पादक राकेश शर्मा ने कहा कि विरह का भाव पूर्ण चित्रण भोगा हुआ सच इन मुक्तकों में है। प्रायः साहित्य में नारी वेदना को बाहुल्य से प्रस्तुत किया जाता रहा है पर राम की वेदना स्मरण दिलाती है इस संग्रह के मुक्तक। वाल पत्रिका ‘देवपुत्र’ के कार्यकारी सम्पादक गोपाल महेश्वरी ने कहा कि इन मुक्तकों में आदर्श प्रेम का भावपूर्ण चित्रण है। कृति आगे की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन देगी।
आरंभ में दीप प्रज्वलन के साथ माँ सरस्वती की आराधना की गई। अतिथियों का स्वागत सूर्यकांत नागर,प्रचार मंत्री अरविंद ओझा,चित्रा राजीव शर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रचार मंत्री श्री ओझा का भारद्वाज परिवार ने सम्मान किया।
कृतिकार श्री भारद्वाज का नगर की कई संस्थाओं ने शाल-श्रीफल से सम्मान किया। हिंदी परिवार से प्रदीप ‘नवीन’,मालवी जाजम से मुकेश इंदौरी,दिनेश तिवारी,उप सभापति कृष्ण कुमार अष्ठाना,डॉ. पद्मासिंह,अरविंद जवलेकर तथा गिरेंद्र सिंह भदोरिया आदि साहित्यकार और सुधिजन कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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