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प्रेम पथ पर बढ़

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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प्रीति प्यार माया मोह,
प्रेम पथ का मार्ग है
ज़िन्दगी में यह एक,
सबसे सुखदायी सन्मार्ग है।

प्रेम पथ पर आगे बढ़,
नहीं रख कोई उम्मीद
यही कहलाता है प्रेम पथ,
सब बन जाते हैं मुरीद।

प्रेम पथ की राह कठिन,
अनगिनत रहती हैं बाधाएं
समर्पण और निकटता से,
खत्म हो जाती है समस्याएं।

ज़िन्दगी सुनसान न हो,
प्रेम पथ की राह पकड़ें
प्रेम भाव पाने के लिए,
ज़िन्दगी में नहीं अकड़ें।

प्रेम पथ सम्पूर्ण किताब है,
ज़िन्दगी की है कहानी लिखी
समर्पण और निकटता से,
अहसास की जिंदगानी कहीं।

प्रेम पथ है काँटों भरा,
सम्भल कर यहां तू चल
जीवन्त रूप में रहने को,
बढ़ता रह बन कर निश्छल।

प्रेम पथ न हो कभी सूना,
इसका तू खुद ध्यान रख
मजबूती से जीवन में पकड़ बना,
नहीं कर कभी अभिमान पर फक्र।

कारवां गुज़र जाएगा यहां,
मत इसकी परवाह कर
समर में बुजदिली मत दिखा,
आहिस्ते-आहिस्ते संग्राम कर।

समर्पण है प्रेम का पथ,
मत इसे अन्धकार दे।
वासनाओं से दूर रह,
ज़िन्दगी में एक धार दे।

प्रेम पथ पर आगे बढ़ना,
सुकून है कुछ पाना नहीं।
आत्मिक शांति और संतुष्टि का है यह क्षण,
प्यार स्नेह और विश्वास से अपनाना सही॥

परिचय–पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।