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बचाना है अपने कल को

श्रीमती देवंती देवी
धनबाद (झारखंड)
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ले के कंचन थाल कपूर घी बाती करिए गंगा माँ की आरती,
माता गंगा ही अपने जल से मनुष्य के भाग्य को संवारती।

बचाना है जल को,जल हम सबके लिए बहुत अनमोल है,
जल है तो प्राण आज भी है,जल है,तो प्राण भी कल है।

नहीं दूषित करेंगे गंगाजल को, नहीं बर्बाद करेंगे जल को,
बचाओ जल को,यदि भविष्य में बचाना है अपने कल को।

गंगा, यमुना, या नदी, तालाब में गंदगी नहीं डालना है,
जीवन संरक्षक जल को,दूषित होने से बचाना है।

आपने कभी नहीं सोचा होगा,अन्न से महंगा जल है,
खेतों में लाता हरियाली,उपजाता भी अन्न को जल है।

श्री सत् गुरु कह गए शिष्यों से, एक दिन ऐसा आएगा,
गंगा पोखरा तालाब कुप छोड़ के, बोतल का पानी पिएगा।

अभी भी वक्त है मित्रों,संभाल लेंगे मिलकर जल को,
खुद सम्भल जाएगा तब,सभी का भविष्य कल को।

पानी है मित्र महती, जिसे जग गंगाजल भी कहता है,
गंगाजल जीवन के अन्त क्षण में,भाग्य से मिलता है॥

परिचय– श्रीमती देवंती देवी का ताल्लुक वर्तमान में स्थाई रुप से झारखण्ड से है,पर जन्म बिहार राज्य में हुआ है। २ अक्टूबर को संसार में आई धनबाद वासी श्रीमती देवंती देवी को हिन्दी-भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। मैट्रिक तक शिक्षित होकर सामाजिक कार्यों में सतत सक्रिय हैं। आपने अनेक गाँवों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है। दहेज प्रथा रोकने के लिए उसके विरोध में जनसंपर्क करते हुए बहुत जगह प्रौढ़ शिक्षा दी। अनेक महिलाओं को शिक्षित कर चुकी देवंती देवी को कविता,दोहा लिखना अति प्रिय है,तो गीत गाना भी अति प्रिय है |

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