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बच्चियाँ रोती है

एल.सी.जैदिया ‘जैदि’
बीकानेर (राजस्थान)
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कहीं पर सिसकियाँ रोती है,
कहीं पर, हिचकियाँ रोती है।

बेरहम हो गया जमाना देखो,
अब तो यहां, बच्चियाँ रोती है।

बिन सैलानी, है समन्दर सूना,
साहिल पर, कस्तियाँ रोती है।

गली-गली,हर राहें सूनी-सूनी,
मौजों के बिन मस्तियाँ रोती है।

चारों तरफ जहां नफरत फैली,
भाईचारे बिन बस्तियाँ रोती है।

खाने वाला,जहां कोई न ‘जैदि’,
वहां दौलतमंद हस्तियाँ रोती है॥