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बड़ा गुनाह

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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बड़ा गुनाह
मिले ऐसी सजा
ना दें पनाह।

कैसा समय
तार-तार अस्मिता
तोड़ा सम्मान।

ये लोक-तंत्र!
बुरा विचार-आग
स्त्री कब तक?

ये कैसी हिंसा ?
लूट रहे अमन
भूले अहिंसा।

जरूरी न्याय
ना हो हैवानियत
ना हो अन्याय।

न करें निंदा
इंसाफ रखे जिंदा
माहौल ऐसा॥

मार दी शर्म
जल रहा मणिपुर
है राज-धर्म।

सब निःशब्द
हर मन में गुस्सा
हो झूठ बंद।

कैसी पशुता
हम हैं आधुनिक!
भीड़ कलंक।

सब शर्मिन्दा
मान लुटा देश का
हो न्याय जिन्दा॥