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बना के दोनों चाँद खुश विधाता

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’
रावतसर(राजस्थान) 
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शरद पूर्णिमा और करवा चौथ विशेष…

शरद पूर्णिमा चंदा करता जगत स्निग्ध उजियारा,
धवल चाँदनी देता लगता हमको कितना प्यारा।

शरद पूर्णिमा उत्तम अपने शास्त्र सभी बतलाते,
खीर बना कर देवों को इस दिन सब भोग लगाते।

प्रियतमा का मुख चाँद पूर्णिमा की उपमा है पाता,
बना के दोनों चाँद बहुत ही खुश है आज विधाता।

शरद पूर्णिमा का चंदा जब भी नभ पर छा जाए,
तब किरणों के साथ धरा पर है अमृत बरसाए।

तिथि चतुर्थी को वधुएँ व्रत करवा चौथ मनाती,
चन्द्र देव का पूजन कर निर्जल उपवास लगाती।

चन्द्र दरश कर पति के हाथों अपना व्रत खुलवाती,
सौभाग्यवती होने का आशीष शिव गौरी से पाती॥

परिचय-शंकरलाल जांगिड़ का लेखन क्षेत्र में उपनाम-शंकर दादाजी है। आपकी जन्मतिथि-२६ फरवरी १९४३ एवं जन्म स्थान-फतेहपुर शेखावटी (सीकर,राजस्थान) है। वर्तमान में रावतसर (जिला हनुमानगढ़)में बसेरा है,जो स्थाई पता है। आपकी शिक्षा सिद्धांत सरोज,सिद्धांत रत्न,संस्कृत प्रवेशिका(जिसमें १० वीं का पाठ्यक्रम था)है। शंकर दादाजी की २ किताबों में १०-१५ रचनाएँ छपी हैं। इनका कार्यक्षेत्र कलकत्ता में नौकरी थी,अब सेवानिवृत्त हैं। श्री जांगिड़ की लेखन विधा कविता, गीत, ग़ज़ल,छंद,दोहे आदि है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-लेखन का शौक है

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