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बनो अर्जुन

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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टूटी हो चप्पल, छाले हों पग,
तो क्या मंजिल नहीं मिलती है
हाथ में साथ हो, बात में हाथ हो,
तो यकीनन मुश्किल टलती है।

अभाव ले जाता है हौंसले के घऱ,
कोई साथ न चले तो भी गम नहीं
लक्ष्य पर रहे बस अचूक ध्यान,
तो तंगी भी बता देती है ये कम नहीं।

बनो अर्जुन, भेद दो लक्ष्य सारे,
बनाओ कीर्तिमान नित निराले।
देखता है जग तुम्हें बड़ी आस से,
गढ़ सफलता नई, ओ हिम्मतवाले॥