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बूढ़े सपने

तारा प्रजापत ‘प्रीत’
रातानाड़ा(राजस्थान) 
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आड़ी-तिरछी
रेखाओं से
अटा चेहरा,
केश घटाएं
चांदी हो गयी,
मंद पड़ गयी
नयन की ज्योति,
पपड़ाए होंठ
सूखा हलक़
झड़ गयी अब तो,
दन्त-मालिका।
लुंज-पुंज ये
देह हो गयी,
वक़्त और
जिम्मेदारियों के बीच
पता ही नहीं चला,
ये रूप की छांव
कब ढल गयी।
कब ज़िन्दगी
फ़िसल गयी,
उम्र के हाथों से
और थकी-सी उम्र ने
दे दी दस्तक़,
बुढ़ापे के जर्जर
दरवाज़े पर,
और आज
इन बूढ़ी आँखों के
सपने भी,
बूढ़े हो गए हैं॥

परिचय-श्रीमती तारा प्रजापत का उपनाम ‘प्रीत’ है।आपका नाता राज्य राजस्थान के जोधपुर स्थित रातानाड़ा स्थित गायत्री विहार से है। जन्मतिथि १ जून १९५७ और जन्म स्थान-बीकानेर (राज.) ही है। स्नातक(बी.ए.) तक शिक्षित प्रीत का कार्यक्षेत्र-गृहस्थी है। कई पत्रिकाओं और दो पुस्तकों में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं,तो अन्य माध्यमों में भी प्रसारित हैं। आपके लेखन का उद्देश्य पसंद का आम करना है। लेखन विधा में कविता,हाइकु,मुक्तक,ग़ज़ल रचती हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी पर कविताओं का प्रसारण होना है।