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भारतीय भाषाओं के लिए जंतर-मंतर पर भरी हुंकार

मुम्बई (महाराष्ट्र)।

‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ और ‘जनता की आवाज फाउंडेशन’ द्वारा भारत के नाम और भारतीय भाषाओं से संबंधित विषयों पर देश के विभिन्न प्रदेशों हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं से संबंधित पचासी सामाजिक साहित्यिक भाषा व अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी संस्थाओं के समर्थन एवं सहयोग से एक दिवसीय जागृति अभियान एवं धरने का आयोजन किया गया। इस दौरान सुप्रसिद्ध भाषा सेनानी व वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक सहित अन्य ने भी इन विषयों का समर्थन किया।
सम्मेलन के निदेशक डॉ. मोतीलाल गुप्ता ‘आदित्य’ ने आंदोलन की मांगें प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि, देश के लोगों को उच्चतम स्तर तक जन भाषा में न्याय दिया जाए, विभिन्न कानूनों के अंतर्गत सूचनाएं अनिवार्यत: देश और राज्यों की भाषाओं में दी जाएँ तथा भारतीय भाषाओं को शिक्षा व रोजगार की भाषा बनाया जाना चाहिए। फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुंदर बोथरा ने कहा कि हजारों साल से हमारे देश का नाम भारत है, इसलिए सभी भाषाओं में भारत का नाम केवल भारत होना चाहिए।
भाषा सेनानी डॉ. वैदिक ने इन विषयों का समर्थन करते हुए कहा कि, उनके लिए सरकार से गुहार लगाने का कोई औचित्य नहीं है। इन विषयों के लिए जन जागरण करते हुए देशवासियों को स्वयं खड़े होना होगा। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने कहा कि ज्ञान-विज्ञान प्राप्त करने की दृष्टि से हमारा विरोध अंग्रेजी से नहीं है, लेकिन हम यह नहीं चाहते कि अंग्रेजी हमारी भाषाओं का स्थान ले।
धरने में उपस्थित उड़ीसा से सांसद रहे व सन्यासी प्रसून पारसाणी ने आंदोलन की मांगों को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि, कोई कारण नहीं है कि मेरे देश को इंडिया कहा जाए। उन्होंने राष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में हिंदी के महत्व को प्रस्तुत करती हुई भारतीय भाषाओं को शिक्षा रोजगार की तरफ ले जाने पर जोर दिया। माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी व सुप्रसिद्ध लेखक संक्रांत सानू ने कहा कि लोग अंग्रेजी में इसलिए नहीं पढ़ते कि उन्हें अंग्रेजी से प्यार है, बल्कि सच्चाई यह है कि भारतीय भाषाओं के लिए शिक्षा रोजगार के विकल्प ही उपलब्ध नहीं है। इसलिए गरीब से गरीब व्यक्ति का अंग्रेजी की तरफ जाना विवशता है, हमें यह समाप्त करना है। भारी बरसात के बावजूद जंतर-मंतर की खुली सड़क पर बड़ी संख्या में भाषा-प्रेमी लोग शाम तक धरने पर बैठे रहे। धरने में भारतीय भाषाओं के सेनानी पुष्पेंद्र सिंह चौहान, प्रसिद्ध हिंदी सेवी डॉ. महेश चंद्र गुप्त, प्रेमपाल शर्मा, आशीष कंधवे, विनोद बब्बर, मुकेश जैन, विजयलक्ष्मी जैन, विपिन गुप्ता, हरपाल सिंह राणा आदि ने भी विचार रखे। आयोजन में राजेश्वर सिंह, इंद्र चंद्र वैद, डॉ. वी. दयालु, राकेश पांडेय, डॉ. बृजेश गौतम, चित्रलेखा शर्मा व सुख वर्षा आदि की प्रमुख उपस्थिति रही।
सुप्रसिद्ध कवियित्री शैलजा तथा नीतू कुमारी ने विषय से संबंधित मनमोहक कविताएंँ प्रस्तुत की। कृष्ण कुमार नरेडा ने धन्यवाद प्रस्तुत किया।

(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुंबई)

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