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भारत माँस निर्यात में विश्व में सबसे आगे यानि ७१ फीसदी माँसाहारी

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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वर्तमान में देश में आवारा पशुओं का माँस उपयोग किया जा रहा है,और उसके बदले हम उससे अधिक राशि का रासायनिक खाद का उपयोग खेती में करते हैंl एक निरुपयोगी पशु भी बहुत खाद का काम करता हैl उसके गोबर और मूत्र का उचित उपयोग करके हम जैविक खाद बनाकर खेती में उपयोग कर सकते हैं,पर उनका रख-रखाव महंगा होने से उन्हें हम आवारा छोड़ देते हैंl तब उनका उपयोग कसाई करते हैंl इसके लिए सरकारों को गौशालाएं और दयोदय केन्द्र खोलकर संरक्षण करना होगाl
आज भारत माँस (बीफ) निर्यात में विश्व में पहले स्थान पर है। भारत में माँस का सालाना कारोबार करीब सालाना २७ हजार करोड़ रुपए है। अमेरिकी कृषि विभाग का कहना है कि माँस के निर्यात में भारत दूसरे देश ब्राजील के साथ संयुक्त रूप से दुनिया में पहले क्रम पर है। आँकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष २०१५-१६ में भारत की माँस बाजार में करीब २० फीसदी की हिस्सेदारी थी। वित्त वर्ष २०१४-१५ में भारत ने २४ लाख टन माँस निर्यात किया था। दुनिया में निर्यात होने वाले कुल माँस में करीब ६० फीसदी हिस्सेदारी भातर,ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया की है। १३-१४ में भारत की भागीदारी २०.०८ फीसदी की थी। इस लिहाज से माँस निर्यात में भारत ने प्रगति की है।
पिछले २ सालों में भारत ने बासमती चावल से भी ज्यादा माँस का निर्यात किया है। पिछले ५ सालों में कुल निर्यात राजस्व में माँस निर्यात से होने वाली आय ०.७६ प्रतिशत से बढक़र १.५६ प्रतिशत हो गई है। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि,ब्राजील में हानिकारक माँस बेचे जाने के कारण यहां माँस का आयात बंद कर दिया गया है। अगर ब्राजील में ये प्रतिबंध लगा रहता है तो भारत सहित कई देशों को फायदा हो सकता है,क्योंकि ब्राजील अब भारत से माँस आयात करने के बारे में सोच रहा है। माँस की सबसे ज्यादा खपत वाले देश चीन ने भारत से माँस आयात पर हामी भरी हैl माँस उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार के ‘पिंक रेवॉल्यूशन’ का नतीजा दिखाई देने लगा है। देश में इसमें बीते ४ साल में ४४ फीसदी वृद्धि हैl
सभी राज्यों के एनीमल हज्बैंड्री डिपार्टमेंट्स से एकत्रित डाटा के मुताबिक पंजीकृत कसाईघरों के माँस उत्पादन साल २००८ के ५.७ लाख टन के मुकाबले २०११ में ८.०५ लाख टन पहुंच गया है। बोवाइन (माँस और कैटल माँस) से होने वाली आय साल २१०२-१३ में करोड़ों रुपए रही। साल २०१२ में भारत माँस निर्यात करने वाला पहले(१) क्रम का देश बना। उत्तर प्रदेश साल २०११ में ३ लाख टन के साथ टॉप माँस उत्पादक राज्य बना।
हालांकि,अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने वाले माँस को यूरोप,दक्षिण-पूर्व एशिया और खाड़ी देशों में भेज दिया जाता है लेकिन एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि देश में बिकने वाले माँस की बड़ी संख्या घटिया किस्म की होती है। श्रेष्ठ गुणवत्ता के माँस को देश से बाहर भेज दिया जाता है,जबकि बी-श्रेणी का घरेलू बाजार में पहुंचता है।
सरकारों की दुरंगी नीतियों के कारण पशु हिंसा बढ़ रही है,और माँस निर्यात निरन्तर बढ़ रहा हैl दूसरी और सरकारें अनमने मन से पशु संरक्षण का नाटक करती हैंl कारण कि माँस के निर्यात से आर्थिक उन्नति होना लक्ष्य हैl इस रफ्तार से यह क्रम चला तो आने वाले वर्षों में पशु धन समाप्त हो जायेगाl इसके लिए चाहिए कि सरकार आवारा पशुओं के संरक्षण वास्ते घास-भूसा और सुरक्षा प्रदान करेl ऊपर के आँकड़ों के हिसाब से माँस खाना हानिकारक है,और अनेक वैज्ञानिकों ने चेताया भी है पर जिव्हा लोलुप लोगों के कारण माँसाहार का चलन बढ़ाना और बढ़ना देश,समाज, परिवार और व्यक्तिगत रूप से हानिकारक होगा और हैl कहीं यह परिपाटी हमारे परिवारों में तो लागू नहीं हो गई,कि अपने वृद्ध (अनुपयोगी) माता-पिता को वृद्धाश्रम में तो नहीं डालने लगे ? गौशालाओं और दयोदय केन्द्रों के माध्यम से जीव दया के साथ पशु संरक्षण भी होगा,और हम अहिंसक समाज के निर्माण में योगदान दे सकेंगेl

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।