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मधुमेह:बचाव भी इलाज़

डॉ.अरविन्द जैन
भोपाल(मध्यप्रदेश)
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मधुमेह(डायबिटीज) एक दीर्घकालिक रोग है, जिसने हाल के वर्षों में कई लोगों को चपेट में लेते हुए सेहत पर बहुत बुरा असर डाला है। मधुमेह की वजह से कई और समस्याएं हो सकती हैं जैसे-दिल का दौरा,जो उम्र को तेजी से बढ़ाता है और गुर्दे को नुकसान पहुंचाता है। भारत में मधुमेह एक ऐसी चुनौती बनती जा रही है,जिसका हल निकाल पाना नामुकिन-सा लग रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार २० से ७० वर्ष की आयु के बीच के लगभग ८.७ फीसदी भारतीय मधुमेह का शिकार हो चुके हैं। मधुमेह एक गैर-संचारी रोग है,लेकिन अस्वास्थ्यकर आहार,तेजी से बढ़ता शहरीकरण और व्यस्त दिनचर्या जैसे कई कारकों के कारण यह बीमारी और भी ज्यादा बढ़ रही है। यह रोग तब होता है,जब अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होता है या शरीर प्रभावी रूप से उत्पादित इंसुलिन का उपयोग करने में असमर्थ होता है।
मधुमेह मूल रूप से २ प्रकार-टाइप १ और टाइप २ का होता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और एक स्वस्थ आहार मधुमेह को रोकने और नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। कई खाद्य पदार्थ इसको नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
मेथी के बीज कार्बोहाइड्रेट को अवशोषित करके और पाचन को धीमा करके रक्त शर्करा को कम करने में मदद करते हैं। ये घुलनशील फाइबर में उच्च होते हैं,इसलिए रक्त शर्करा के स्तर को कम करते हैं तथा शरीर की ग्लूकोज सहिष्णुता क्षमता में सुधार करते हैं। इसका पाउडर के रूप में सेवन कर सकते हैं।
ऐसे ही आंवला रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक पारंपरिक उपाय है। आंवले में मौजूद क्रोमियम नामक खनिज कार्बोहाइड्रेट चयापचय को नियंत्रित करता है और शरीर को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनने में मदद करता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद करता है। आंवला इंसुलिन के उचित अवशोषण में सहायता करता है,जो अंततः रक्त शर्करा के स्तर में कमी की ओर जाता है। आंवले को कच्चा खाया जा सकता है या फिर इसका रस पी सकते हैं।
फल फाइबर,खनिज और विटामिन से भरे होते हैं। ये सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। कुछ फल विशेष रूप से जामुन जैसे स्ट्रॉबेरी,ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी शरीर में रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। जामुन मधुमेह से ग्रस्त लोगों के लिए सबसे अच्छे फलों में से एक है। ब्लूबेरी और ब्लैकबेरी को ऐसे ही खा सकते हैं,या बिना वसा वाले दही में मिला सकते हैं। इसी तरह सिनेमोन(दालचीनी) इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ा सकती है। यह कोशिकाओं में ग्लूकोज के परिवहन को बढ़ाकर और इंसुलिन के प्रभावों का अनुकरण कर रक्त शर्करा को कम करने और मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करती है। दालचीनी भोजन से पहले रक्त शर्करा को कम करने में भी मदद करती है। अध्ययनों से पता चला है कि,भोजन में दालचीनी के सेवन से आम मधुमेह की समस्या के खतरे को भी कम कर सकते हैं। इसे भोजन में या इसे गर्म पानी के साथ पीस कर भी सेवन किया जा सकता है।
ऐसे ही पालक और गोभी भी मधुमेह को नियंत्रण में रखने में मदद करते हैं क्योंकि इनमें पॉलीफेनोल की उच्च सांद्रता होती है। इसमें मैग्नीशियम भी होता है जो मधुमेह के खतरे को कम करता है। पत्तेदार साग और हरी सब्जियां खनिज व विटामिन का अच्छा स्रोत हैं,जो शरीर के लिए आवश्यक हैं। ल्यूटिन और ज़ेक्सैंथिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट अधिकांश हरी सब्जियों में मौजूद होते हैं,जो मधुमेह की जटिलताओं से बचाते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों का रस पी सकते हैं,सलाद में इस्तेमाल कर सकते हैं या पका कर खा सकते हैं। इस प्रकार मधुमेह से पूरा बचाव किया जा सकता है।

परिचय- डॉ.अरविन्द जैन का जन्म १४ मार्च १९५१ को हुआ है। वर्तमान में आप होशंगाबाद रोड भोपाल में रहते हैं। मध्यप्रदेश के राजाओं वाले शहर भोपाल निवासी डॉ.जैन की शिक्षा बीएएमएस(स्वर्ण पदक ) एम.ए.एम.एस. है। कार्य क्षेत्र में आप सेवानिवृत्त उप संचालक(आयुर्वेद)हैं। सामाजिक गतिविधियों में शाकाहार परिषद् के वर्ष १९८५ से संस्थापक हैं। साथ ही एनआईएमए और हिंदी भवन,हिंदी साहित्य अकादमी सहित कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। आपकी लेखन विधा-उपन्यास, स्तम्भ तथा लेख की है। प्रकाशन में आपके खाते में-आनंद,कही अनकही,चार इमली,चौपाल तथा चतुर्भुज आदि हैं। बतौर पुरस्कार लगभग १२ सम्मान-तुलसी साहित्य अकादमी,श्री अम्बिकाप्रसाद दिव्य,वरिष्ठ साहित्कार,उत्कृष्ट चिकित्सक,पूर्वोत्तर साहित्य अकादमी आदि हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी अभिव्यक्ति द्वारा सामाजिक चेतना लाना और आत्म संतुष्टि है।

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