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मन से अमीर रहिए

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’
सोलन (हिमाचल प्रदेश)
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सतरंगी दुनिया-३३…

हमारे समाज को सब पता है कि कौन किसके साथ घूम रहा है, किसकी बहू, बेटी कहाँ जा रही है, और किसके बेटे का कहाँ लफड़ा है ?, लेकिन किसके घर आज खाना नहीं बना, ये समाज को नहीं पता और न ही जानना चाहते हैं। शेर को पकड़ने के ३ तरीके हैं।न्यूटन का तरीका-शेर को अपने पास आने दो, जैसे ही हमारे पास आ जाए, उसे पकड़ लो। आइंस्टाइन का तरीका-शेर का तब तक पीछा करो, जब तक कि वह थक न जाए, जैसे ही वह थक जाए, उसे पकड़ लो और अंतिम तरीका पुलिस का-खरगोश को पकड़ो और उसे तब तक पीटते रहो; जब तक कि वह स्वीकार न कर ले कि वही शेर है।
  कलियुग चल रहा है गलत को गलत ही रहने दो। अगर गलत को गलत साबित करने जाओगे तो खुद ही गलत साबित कर दिए जाओगे। सुबह पत्नी चाय-नाश्ता पूछने आई तो मैंने कहा-बना दो। फिर रुक कर पूछने लगी- ये मोदी जी १ दिन में ३ देश कैसे घूम सकते हैं ? मैंने कहा- अगर बीवी साथ में न हो तो आदमी १ दिन में जाकर जाकर मास्को, काबुल और लाहौर घूमते हुए दिल्ली आ सकता है। वरना डी-मार्ट में ही शाम हो जाती है। बस उसके बाद न चाय आई, न नाश्ता। अगर सोचना ही है तो कमाने की सोचो, जमाने की नहीं। जब भी आपको सही सलाह की जरूरत हो तो हारने वालों से किया करें, जीतने वाले मुश्किलों के बारे में नहीं बताते हैं। गंगा में वही पाप धुलते हैं, जो गलती से होते हैं। योजना बनाकर किए गए पाप लट्ठ से ही धुलते हैं। शब्द और शस्त्र दोनों का उपयोग संभालकर कीजिए, क्योंकि शस्त्र से शरीर घायल होता है और शब्द से आत्मा घायल होती है। आशा और विश्वास हमेशा सोच-समझ कर लायक व्यक्ति पर करना चाहिए।     आजकल रिश्ते प्राईवेट जॉब की तरह हो गए हैं- बेहतर आफर मिलते ही लोग ‘चेंज’ कर लेते हैं। अब तो भारतीय जीवन बीमा को एक नया बीमा प्लान लॉच करना चाहिए -‘हनीमून प्लस’, हनीमून के साथ भी, हनीमून के बाद भी।  पेरेन्ट्स मीटिंग में पिता मैडम को बड़े ध्यान से देख रहा था, तो मैडम ने कहा-बस इतना ध्यान आपको अपने बच्चे पर देना है।
 नई नवेली बहू से सास ने कहा- मुझे जल्दी से पोता चाहिए। बहू भी हाजिर जवाब थी, उसने कहा-माँजी, अगर आप पहले बताती, तो मैं साथ लेकर आ जाती। मौसम कितना भी बदल ले, परन्तु इंसान से ज्यादा बदलने का हूनर उसके पास नहीं है। अहंकार ऐसा मेहमान है, जो आता तो अकेले है, लेकिन जाते-जाते सब रिश्ते साथ ले जाता है। वक़्त बता सकता है, कि आपके पास कितनी दौलत है, लेकिन दौलत नहीं बता सकती कि आपके पास कितना वक़्त है। इसलिए मन से अमीर रहिए, धन का क्या है; आता-जाता रहता है।
   दुनिया तुम्हें हमेशा गिरता हुआ देखकर खुश होगी और उठ‌ता हुआ देखकर जलेगी, इसलिए खुद के लिए जीना सीख लो। हमेशा समय की कद्र करो, क्योंकि एक बार बीता हुआ समय कभी वापस लौटकर नहीं आता। एक बात मुझे समझ में नहीं आती अगर बैड रूम में लाखों रूपए भी खर्च करें, तो भी उसको ‘बैडरूम’ बोलते हैं; उसको ‘गुड रूम’ क्यों नहीं बोलते। नींद पूरी होते ही दुकान और दुकान पूरी होते ही नींद, बस यही चल रहा है ज़िंदगी में। उत्तर दीजिए-देश में बलात्कार कैसे रूकेगा ? गांधी के चरखे से आम्बेडकर के संविधान से या गोडसे की गोली से ? पहले खून के रिश्ते रोते थे, अब रिश्तों का खून हो रहा है।
    इस दुनिया में कोई दूध का धुला नहीं है। इस दुनिया में कर्म सबके होते हैं। फर्क इतना है कि किसी के ‘छुप’ जाते हैं, और किसी के ‘छप’ जाते हैं। हर पेड़ फल दे, यह जरूरी नहीं; किसी की छाया भी बड़ा सकून देती है। ईश्वर जिनको रिश्ते में बाँधना भूल जाता है उन्हें दोस्त बना देता है। परिस्थितियों के अनुसार हर चीज सुंदर है, जो स्कूल की घंटी सुबह के समय बेकार लगती है, वही छुट्टी के समय बहुत अच्छी लगती है। रिश्ते और पौधे दोनों एक जैसे होते हैं -लगाकर भूल जाओ तो दोनों सूख जाते हैं। अपनी निजी ज़िंदगी को एक बंद किताब की तरह रखिए, क्योंकि खुले पन्नों को लोग अक्सर फाड़कर फेंक देते हैं।
पता नहीं कैसे परखता है मेरा भगवान मुझे,
इम्तिहान भी मुश्किल लेता है, और फेल भी नहीं होने देता है।

परिचय-डॉ. प्रताप मोहन का लेखन जगत में ‘भारतीय’ नाम है। १५ जून १९६२ को कटनी (म.प्र.)में अवतरित हुए डॉ. मोहन का वर्तमान में जिला सोलन स्थित चक्का रोड, बद्दी (हि.प्र.)में बसेरा है। आपका स्थाई पता स्थाई पता हिमाचल प्रदेश ही है। सिंधी,हिंदी एवं अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले डॉ. मोहन ने बीएससी सहित आर.एम.पी.,एन. डी.,बी.ई.एम.एस., एम.ए., एल.एल.बी.,सी. एच.आर.,सी.ए.एफ.ई. तथा एम.पी.ए. की शिक्षा भी प्राप्त की है। कार्य क्षेत्र में दवा व्यवसायी ‘भारतीय’ सामाजिक गतिविधि में सिंधी भाषा-आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का प्रचार करने सहित थैलेसीमिया बीमारी के प्रति समाज में जागृति फैलाते हैं। इनकी लेखन विधा-क्षणिका, व्यंग्य लेख एवं ग़ज़ल है। कई राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन जारी है। ‘उजाले की ओर’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित है। आपको राजस्थान से ‘काव्य कलपज्ञ’,उ.प्र. द्वारा ‘हिन्दी भूषण श्री’ की उपाधि एवं हि.प्र. से ‘सुमेधा श्री २०१९’ सम्मान दिया गया है। विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अध्यक्ष (सिंधुडी संस्था)होना है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-साहित्य का सृजन करना है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक-मुंशी प्रेमचंद एवं प्रेरणापुंज-प्रो. सत्यनारायण अग्रवाल हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले,हमें ऐसा प्रयास करना चाहिए। नई पीढ़ी को हम हिंदी भाषा का ज्ञान दें, ताकि हिंदी भाषा का समुचित विकास हो सके |