डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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युद्ध और शांति: जरूरी क्या ?…
कैसा तम बिखरा हुआ, डरता मन का मोर।
सभी आज सहमे हुए, मचा हुआ है शोर॥
बतियाती ना अब हवा, पूछ रही ना हाल।
चुप चुप रहते खग सभी, बदली उनकी चाल॥
सूरज भी तो जग उठा, सुन चिड़ियों का शोर।
उसे आज मैं बांध दूं, शुभ शगुनों की डोर॥
देख तमाशा मौत का, मचती चीख-पुकार।
शांति का अब राज हो, है इसकी दरकार॥
चुटकी भर है चाँदनी, मुट्ठीभर है धूप।
बाकी तिमिर भरा हुआ, बदला जग का रूप॥
पर्वत-सा तो दुख हुआ, सुख का हुआ अभाव,
महायुद्ध बढ़ता रहा, कोशिश भरे अलाव॥
तोड़ो नफरत की कड़ी, लेकर मुख मुस्कान।
हाथ जोड़ विनती करो, समझो अब श्रीमान॥
महायुद्ध का नाश हो, कुछ तो समझो हाल।
मंत्र यही तुम मान लो, दूर भगाओ काल॥