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माँ है गीता

अजय जैन ‘विकल्प
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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माँ है गीता,माँ है कुरान,
माँ को करिए रोज प्रणाम।

ईश्वर भी नमता जहां पर,
माँ ही संसार में असली भगवान।

जिसने पाला हमको,वो कैसे अनपढ़ ?
माँ तो है सच में ज्ञान की खान।

कभी मत दुत्कारो उसको,
देती दुआ माँ की मुस्कान।

अमूल्य है माँ हर जगत में,
सानी नहीं माँ का कोई इंसान।

जन्म दे मुझे यह संसार दिया,
दुःख झेला खुद,दिया नवजीवन।

मुझे दर्द नहीं होने देती,
बोले हरपल ऐसी मीठी जुबान।

नहीं मिलावट उसकी ममता में,
जी चाहे,कर दूँ खुद को कुर्बान॥

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