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‘मित्रता’ ईश्वर की करिश्माई देन

गोपाल मोहन मिश्र
दरभंगा (बिहार)
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मित्रता और जीवन…

मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है,
बँधी हुई जिन्दगी ने यहीं आजादी पाई है
चेहरे की रंगत इसने लौटाई है,
आँखों ने ख्वाबों की दुनिया पाई है
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…।

बेगानों की भीड़ में किसी अपने से,
मुलाकात हो पाई है
मुस्कराहट फिर से लौट आई है,
बातों के सिलसिले ने महफिल सजाई है
माहौल में खुशबू सी छाई है,
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…।

जाति-धर्म ऊँच-नीच की यहाँ,
नहीं कोई सुनवाई है
मंदिर-मस्जिद-गुरूद्वारे-चर्च सबकी छवि,
इसने एक ही बनाई है
अपनेपन की भावना इसने ही जगाई है,
खूबसूरती जिन्दगी में इससे ही आई है
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…।

बचपन की ताजगी इससे ही छाई है,
मौसम में मस्तानगी इसने ही लाई है
उम्र के पड़ावों में इसने,
अपनी गहरी भूमिका निभाई है
सारी चतुराई इसने ही सिखलाई है,
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…।

सपनों को हकीकत की राह,
इसने ही दिखाई है
हिम्मत इसने हमेशा ही बढ़ाई है,
हुनर से पहचान करवाई है
सफर की थकान इसने मिटाई है,
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…।

हर दर्द की होती सुनवाई है,
अच्छे या हों बुरे हालात
संगत इसने हमेशा निभाई है,
उदासी इसने दूर भगाई है
रोते हुए चेहरे में हँसी आई है,
भरोसे की ताकत इसने बढ़ाई है
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…।

सागर से भी गहरी इसकी गहराई है,
बिना रस्मों के इसने कसमें निभाई है।
मित्रता ईश्वर की देन करिश्माई है…॥

परिचय–गोपाल मोहन मिश्र की जन्म तारीख २८ जुलाई १९५५ व जन्म स्थान मुजफ्फरपुर (बिहार)है। वर्तमान में आप लहेरिया सराय (दरभंगा,बिहार)में निवासरत हैं,जबकि स्थाई पता-ग्राम सोती सलेमपुर(जिला समस्तीपुर-बिहार)है। हिंदी,मैथिली तथा अंग्रेजी भाषा का ज्ञान रखने वाले बिहारवासी श्री मिश्र की पूर्ण शिक्षा स्नातकोत्तर है। कार्यक्षेत्र में सेवानिवृत्त(बैंक प्रबंधक)हैं। आपकी लेखन विधा-कहानी, लघुकथा,लेख एवं कविता है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। ब्लॉग पर भी भावनाएँ व्यक्त करने वाले श्री मिश्र की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा है। इनके लिए पसंदीदा हिन्दी लेखक- फणीश्वरनाथ ‘रेणु’,रामधारी सिंह ‘दिनकर’, गोपाल दास ‘नीरज’, हरिवंश राय बच्चन एवं प्रेरणापुंज-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शानदार नेतृत्व में बहुमुखी विकास और दुनियाभर में पहचान बना रहा है I हिंदी,हिंदू,हिंदुस्तान की प्रबल धारा बह रही हैI”

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