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मेरे हर गुरु को नमन

संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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मेरे भाग्य विधाता… (शिक्षक दिवस विशेष)…

गुरु नहीं, तुम दीपक हो,
अंधेरों में जो राह दिखाते हो
हाथ में चॉक नहीं, भविष्य है,
जिससे तुम किस्मत बनाते हो।

तुमने कहा – डरना नहीं है,
तुमने कहा – झुकना नहीं है
हर सवाल का जबाब,
किताब में नहीं, यह बात 
तुमने ही तो सिखाई है।

आज जो कुछ भी हूँ मैं,
तुम्हारी वजह से हूँ
अक्षर तो सबने पढ़ाए,
पर ज़िंदगी जीना तुमने सिखाया है।

ना वेतन बड़ा, ना नाम बड़ा,
पर काम सबसे बड़ा है तुम्हारा।
एक बच्चा पढ़ा तो पीढ़ी सुधरी,
ये जादू है या हुनर तुम्हारा॥