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रामलला विराज रहे भवन में

सपना सी.पी. साहू ‘स्वप्निल’
इंदौर (मध्यप्रदेश )
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रामलला भवन में विराज रहे, ढोल, ताशे, नगाडे़ बाज रहे…।

ये सिर्फ भवन नहीं हिन्दुओं की भावनाओं का निर्माण,
रामलला के भव्य मंदिर में सनातनियों के बसे प्राण।
हम सभी को बढ़-चढ़ कर देना है अपना-अपना भाग,
दान के बाद, राम के कार्य करने में है परम सौभाग्य॥
रामलला भवन में विराज रहे…

यह मंदिर हमारी आस्था
और विश्वास का केन्द्र बिंदु,
टेन्ट में रहकर भी वे कृपा करते रहे राम है दया सिंधु।
पाँच सौ पचास वर्ष बाद पर्वोत्सव मनाने का अवसर,
राम के आदर्शों में दृढ़विश्वास, सीताराम प्रेम सरोवर॥
रामलला भवन में विराज रहे…

अयोध्या में जन्में रामलला हमारे आराध्य भगवान,
रामराज्य पुनर्स्थापना से भारत बनेगा और महान।
अब ईश विराजेंगे महल से मंदिर के स्वर्ण सिंहासन,
श्रद्धा दीप से जगमग दीपोत्सव बने हर घर आँगन॥
रामलला भवन में विराज रहे…