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रिमझिम सावन आया

डॉ.अशोक
पटना(बिहार)
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रिमझिम सावन आते ही,
पड़ने लगती खूब फुहार है
आनंदित होकर हम सब,
खूब मस्ती करने लगते हैं
वर्षा से खूब खिलवाड़ है।

झुण्ड के संग झूला झूलने का,
उत्तम सर्वोत्तम एक त्योहार है
मस्ती से खूब प्यार करते रहने का,
यह देता सर्वोत्तम संस्कार है।

तपती धरा को अब मिलती खूब खुशियाँ,
जब से रिमझिम यह सावन जो आया
किसानों में अब खुशहाली खूब लाता है यह,
सबके दिल में अपनेपन की जगह बनाई।

आदि शिव की पूजा-अर्चना,
भावपूर्ण से दिल को खूब भाया
मस्ती और हुड़दंग धमाल से,
हर घर है खुशियाँ फैलाई।

रिमझिम सावन के आने से,
हृदय में तरंगें, मन हर्षाती।
मस्ती से सब झूम-झूम कर,
मस्ती करती दिल को खूब भाती।

सावन की रिमझिम छाया में,
खुशियाँ मिलती है खूब अपार
दिल को छू जाती है आने से,
उमंग और उल्लास का दिखता संस्कार।

रिमझिम बारिश में सब हैं खुश दिखते,
दिल को है यह खूब हर्षित करती
हरियाली का श्रंगार पृथ्वी पर यह लाकर,
सबमें दिल से खूब उत्साहित दिखती।

जेठ गया, खूब जलन की काया,
हृदय के द्वार से खूब दूर गई
सावन के आने से सब गुलशन,
खूबसूरत बन कर खूब खिल गई।

रिमझिम सावन की अमृत बूँदों ने,
तपती धरती का घमंड मिटाया
खुशियाँ लेकर आईं इतनी बड़ी कि,
सबमें मस्ती का खूब रंग सजाया।

यह उत्तम माह है आदि शिव पूजन का,
समृद्धि और ऐश्वर्य खूब है यह लाता
महिलाओं के लिए यहां इस माह में,
झूमती संग झुण्ड में खुशियाँ हैं पाती।

आया सावन बड़ा मनभावन,
खुशियाँ लाता अपूर्व अपार है
महिलाओं में उफनती खूब खुशियाँ,
सर्वोत्तम पवित्र पावन त्यौहार है।

झूला झूलती सब संग सखियाँ,
मस्ती करती खूब गुलजार है
सावन की रिमझिम बारिश से,
पाती अमृत धारा की संसार है।

आया सावन मधुर सुहावना,
रंग दिखता खूब गुलजार है
सखियों संग मिलती है खुशियां,
मिलता स्वर्ग-सा अनन्य प्यार है।

मधुश्रावणी पर्व है खूब सुन्दर,
यहां यह रंग खूब जमाता है
नव विवाहिताओं के मन मन्दिर में,
प्रेम के रंग यह लहराता है।

हर पल दिखती उमंग खुशी की,
सावन मिलन है अमृत त्योहार
घर-घर में खुशहाली लाने को,
महिलाओं में दिखता खूब श्रंगार।

झूला झूलती बाग में संग सखियाँ,
उन्मुक्त भाव से खूब सब इठलाती है
रिमझिम सावन के आने से सब महिलाएं,
हृदय पुष्प से खूब भर जाती है।

रिमझिम बारिश में सब लोग,
खूब खुशियाँ यहां मनाते हैं।
ज़िन्दगी की भाग-दौड़ से,
सावन आने से सुकून बहुत सब पाते हैं॥

परिचय–पटना(बिहार) में निवासरत डॉ.अशोक कुमार शर्मा कविता,लेख,लघुकथा व बाल कहानी लिखते हैं। आप डॉ.अशोक के नाम से रचना कर्म में सक्रिय हैं। शिक्षा एम.काम.,एम.ए.(राजनीति शास्त्र,अर्थशास्त्र, हिंदी,इतिहास,लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास) सहित एलएलबी,एलएलएम,सीएआईआईबी, एमबीए व पीएच-डी.(रांची) है। अपर आयुक्त (प्रशासन)पद से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा द्वारा लिखित अनेक लघुकथा और कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं,जिसमें-क्षितिज,गुलदस्ता, रजनीगंधा (लघुकथा संग्रह) आदि है। अमलतास,शेफालीका,गुलमोहर, चंद्रमलिका,नीलकमल एवं अपराजिता (लघुकथा संग्रह) आदि प्रकाशन में है। ऐसे ही ५ बाल कहानी (पक्षियों की एकता की शक्ति,चिंटू लोमड़ी की चालाकी एवं रियान कौवा की झूठी चाल आदि) प्रकाशित हो चुकी है। आपने सम्मान के रूप में अंतराष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच द्वारा काव्य क्षेत्र में तीसरा,लेखन क्षेत्र में प्रथम,पांचवां,आठवां स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के अखबारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।