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वार्षिकोत्सव में साहित्य के योगदान पर चर्चा, १४ पुस्तक लोकार्पित

लखनऊ (उप्र)।

युगधारा फाउंडेशन तथा मुक्तक लोक सम्पूर्ण हिन्दी साहित्यांगन संयुक्त तत्वावधान में वार्षिकोत्सव का शुभारंभ शनिवार को नकलंग धाम के सभागार में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रकाण्ड विद्वान डॉ. दिनेश चंद्र शास्त्री ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। अध्यक्षता प्रो. डॉ. राम विनय सिंह ने की।
संस्था अध्यक्ष गीता अवस्थी के अतिरिक्त डॉ. कृपाशंकर मिश्र, डॉ. ऋतु ध्वज सिंह, अश्वनी कुमार और और डॉ. रामकृष्ण सहस्रबुद्धे (नागपुर) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने साहित्य के योगदान, समाज पर उसका प्रभाव और आत्मबोध से विश्व बोध जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। संस्था का परिचय महासचिव सौम्या मिश्रा अनुश्री ने दिया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में १४ पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इसमें ‘सर्जना के विविध आयाम’, डॉ. सहस्रबुद्धे की कृति ‘प्यार के धागे’ और डॉ. मुकंद नीलकंठ जोशी की ‘अपनी सबकी मौज’ आदि रही।
कुशल संचालन पवन शर्मा ने किया।