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विडम्बना

सुशांत सुप्रिय 
ग़ाज़ियाबाद (उत्तरप्रदेश)

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उदास है,
शिकंजी बेचने वालाl

उदास है,
भड़भूँजा बेचने वालाl

उदास है,
शकरकंदी बेचने वालाl

नहीं बिक पा रही हैं
इनकी देसी चीज़ें,
लेकिन हरा है मौसम,
बाज़ार काl

वह देखो…
कितनी भीड़ है,
चिप्स और कोक-पेप्सी
बेचने वाली दुकान पर,
हँसते-हँसते दोहरे हुए जा रहे हैं
पिज़्ज़ा-बर्गर के सभी आउट-लेटll

परिचय : सुशांत सुप्रिय का निवास ग़ाज़ियाबाद (उ. प्र.) में है। इनकी प्रकाशित पुस्तकों में कथा संग्रह-`हत्यारे`,`हे राम`,`दलदल`,`पिता के नाम` एवं `ग़ौरतलब कहानियाँ` सहित काव्य संग्रह-`इस रूट की सभी लाइनें व्यस्त हैं` और `अयोध्या से गुजरात तक` तथा अनुवाद-`विश्व की श्रेष्ठ कहानियाँ`,`विश्व की चर्चित कहानियाँ` एवं `विश्व की कालजयी कहानियाँ` आदि हैं। सुशांत सुप्रिय का जन्म २८ मार्च १९६८ को हुआ है। शिक्षा-एम.ए.(अंग्रेज़ी),एम.ए.(भाषा विज्ञान)है। प्रकाशित कृतियों पर आपको भाषा विभाग (पंजाब) तथा प्रकाशन विभाग(भारत सरकार) द्वारा पुरस्कृत किया गया है तो कमलेश्वर-स्मृति(कथाबिंब)कहानी प्रतियोगिता में लगातार २ वर्ष प्रथम सहित अन्य कथा-कहानी स्पर्धा में पुरस्कार मिले हैं। साहित्य में अवदान के लिए हरियाणा में २०१७ में सम्मानित हुए हैं। आपकी उपलब्धि यह है कि,कहानी `दुमदार जी की दुम` पर फ़िल्म निर्देशक विनय धूमले  हिंदी फ़िल्म बना रहे हैं। कहानी `हे राम` का नाट्य-प्रेमियों की माँग पर कई बार मंचन किया गया। ऐसे ही पांडिचेरी विश्वविद्यालय ने आपकी कहानी `एक दिन अचानक` के नाट्य-रूपांतर का मंचन किया है तो,कई कहानियाँ व कविताएँ अंग्रेज़ी,उर्दू,नेपाली,पंजाबी, सिंधी,उड़िया,मराठी,असमिया व मलयालम आदि भाषाओं में अनुदित व प्रकाशित हुई हैं। `हे राम!` केरल के कलडी विवि के पाठ्यक्रम में शामिल की गई है। ऐसे ही कुछ अन्य रचनाएँ भी पाठ्यक्रम में शामिल हैं। लेखन के अतिरिक्त स्केचिंग,गायन, शतरंज व टेबल-टेनिस का शौक़ रखने वाले सुशांत सुप्रिय बतौर संप्रति लोकसभा सचिवालय(दिल्ली) में अधिकारी हैं।

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