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वो माँ होती है….

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद विनम्र’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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माँ अनमोल रिश्ता (मातृ दिवस विशेष) …

काला टीका मेरे सिर लगा हर बुरी बला से बचा लेती है,
आँचल से अपने ढक अमृत पा कराएं वो माँ होती है।

विपत्तिया कैसी भी हो अक्सर खुश रहती है,
गमों में भी जो सदा मुस्कुराए वो माँ होती है।

जन्नत की सारी खुशियाँ हम पर वार देती है,
गोद में अपनी उठा जो ममता लुटाए वो माँ होती है।

मांगने से पहले ही हर मन्नत पूरी कर देती है,
चाँद को भी जो जमीं पर उतार लाए वो माँ होती है।

माँ कौशल्या-सा दुलार, देवकी-सा लाड़ देती है,
सारी बलाएं जो एक पल में हर ले वो माँ होती है।

भगत-सा देशप्रेम और आजाद-सा साहस देती है,
वतन लिए जो लाल कुर्बान कर दे वो माँ होती है।

वीर शिवाजी और राणा प्रताप-सा गौरव देती है,
कलेजा अपना रख जो लाल पुकारे वो माँ होती है।

वो कृष्ण भी बना देती है वो भी राम बना देती है,
अपनी ममता से सारे दुर्गुण मिटा दे वो माँ होती है।

आम्बेडकर, सुभाष बनने की प्रेरणा भी देती है,
सत्य-अहिंसा का पाठ सदा पढ़ाए, वो माँ होती है॥

परिचय–विनोद कुमार सोनगीर का निवास मध्यप्रदेश के इन्दौर जिले में है,पर स्थाई मंडलेश्वर में है। साहित्यिक उपनाम-कवि विनोद विनम्र से पहचाने जाने वाले श्री सोनगीर की जन्म तारीख १ जुलाई १९८२ है। इनको भाषा ज्ञान-हिंदी व इंग्लिश का है। बी.एससी.(जीव विज्ञान),एम.ए.(समाज शास्त्र), एम.एस-सी.(रसायन) सहित डी.एड. और सी.टी.ई.टी. तक शिक्षित होकर कार्य क्षेत्र में शासकीय सेवक (शिक्षक)हैं। आप सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत पर्यावरण सुरक्षा,बालिका शिक्षा हेतु सदैव तत्पर हैं। कवि विनोद की लेखन विधा-गीत,ग़ज़ल,लेख और कविता है। कईं पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाओं को स्थान मिला है। प्राप्त सम्मान तथा पुरस्कार निमित्त आपको शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु व संगठन हित में सक्रिय भूमिका हेतु कर्मचारी संगठन से सम्मान,शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा हेतु ग्राम पंचायत उमरीखेड़ा आदि से सम्मान हासिल हुए हैं। विशेष उपलब्धि-उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित होना है। लेखनी का उद्देश्य-लेखन से सभी का शुद्ध मनोरंजन करना,व समाज को नई दिशा प्रदान करना है। आपकी नजर में पसंदीदा हिंदी लेखक सभी हैं,तो प्रेरणापुंज-डॉ.राहत इंदौरी हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार,हास्य,व्यंग्य और वीर रस पर लेखन की है। देश और हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार-“देश में हिंदी साहित्य के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार अत्यंत आवश्यक है। हिंदी भाषा को इंग्लिश से बचाने के लिए साहित्य का प्रसार अत्यंत आवश्यक है।” कवि विनोद के जीवन का लक्ष्य-श्रेष्ठ कार्य सतत करते रहना है।

 

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