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शब्दांजलि शहीदों को…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’
बूंदी (राजस्थान)
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ऐ शहीदों….
तुम अपनी चिताओं में,
गर्मी बनाए रखना
ये गर्मी ही तो युवाओं के,
रक्त को उबालेगी।

उबलेगा जब रगों में,
रक्त अपने युवाओं का
तब ही तो ये भारत माँ,
मस्तक गर्व से उठा लेगी।
ऐ शहीदों…

जलती रहेगी जब तलक,
चिताएं यूँ शहीदों की
उसकी ही आंच से फिर,
हर माँ स्वपुत्र पालेगी
आए जो सामने कोई,
देश का दुश्मन भी जब,
देश की हर बाला भी
शमशीर को उठा लेगी।
ऐ शहीदों…

दीपक की लौ भी जब,
उग्र ज्वाला भड़का लेगी
फिर क्या मजाल उन ताकतों की,
जो देश अपना चुरा लेगी
आए जो ‘आततायी’ भी,
उतर कर ‘नापाक’ से
जलाकर भस्म बना उनको,
खाक में मिला देगी।
ऐ शहीदों…

भर दो उस आग को,
जला कर जिस्म तुम अपना
फड़कती उन भुजाओं में,
जो लड़कर हर एक दुश्मन से
भारत देश को फिर से बचा लेगी
ज़ाया न जाने पाए,
शहादत तुम्हारे हर कतरे खून की,
उस खून की ज्वाला ही तो
कोई ज्वालामुखी भड़का लेगी।
ऐ शहीदों…

नमन है उन शहीदों को,
जो हुए चिताओं में आहूत हैं
वो ही तपन इस देश को,
अब फौलाद भी बना देगी।
सुनाकर ‘अजस्र’ वो कहानी,
तुम्हारी ओज-शहादत की
भारत के सपूतों में फिर से,
देशभक्ति जगा देगी।
ऐ शहीदों…
तुम अपनी चिताओं में,
गर्मी बनाए रखना।
ये गर्मी ही तो युवाओं के,
रक्त को उबालेगी॥

परिचय–आप लेखन क्षेत्र में डी.कुमार ‘अजस्र’ के नाम से पहचाने जाते हैं। दुर्गेश कुमार मेघवाल की जन्मतिथि १७ मई १९७७ तथा जन्म स्थान बूंदी (राजस्थान) है। आप बूंदी शहर में इंद्रा कॉलोनी में बसे हुए हैं। हिन्दी में स्नातकोत्तर तक शिक्षा लेने के बाद शिक्षा को कार्यक्षेत्र बना रखा है। सामाजिक क्षेत्र में आप शिक्षक के रुप में जागरूकता फैलाते हैं। लेखन विधा-काव्य और आलेख है,और इसके ज़रिए ही सामाजिक मीडिया पर सक्रिय हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-नागरी लिपि की सेवा,मन की सन्तुष्टि,यश प्राप्ति और हो सके तो अर्थ प्राप्ति भी है। २०१८ में श्री मेघवाल की रचना का प्रकाशन साझा काव्य संग्रह में हुआ है। आपकी लेखनी को बाबू बालमुकुंद गुप्त साहित्य सेवा सम्मान आदि मिले हैं।

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