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संकल्प या समर्पण

संदीप धीमान 
चमोली (उत्तराखंड)
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संकल्प रावन किया
किया समर्पण हनुमान,
मार्ग भक्ति के दोनों
दोनों ने पाया भगवान।

खोज ब्रह्म की करता
विपरीत ज्ञान को जान,
बैठा भीतर आत्म ब्रह्म
ढूंढे बाहर बाहर इंसान।

तीन राह भक्ति की
इंसानी आडम्बर मान,
संकल्प,समर्पण मात्र
ईश्वर संग रहे विद्यमान।

संकल्प के पीछे अहम
‘मै’ पूर्ण जन्म तू जान,
पंडित,राक्षस हो जाएं
संकल्प छिपा अभिमान।

भाव समर्पण दास-सा,
संग अश्रु प्रेम आस का।
भक्त भी ईश्वर हो जाएं,
हनुमान,राम की जान॥

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