ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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सपनों की दुनिया में उड़ने वालों,
जरा धरती पर पैर रख कर चलो।
माना कि सपनों में सुख है बहुत,
मगर थोड़े से दु:ख भी सहते चलो।
सुख और दु:ख दोनों ही तो बहनें हैं,
इन बहनों पर प्यार लुटाते चलो।
धरती पर फूल के साथ काँटें भी हैं उगते,
जरा काँटों का भी लुत्फ उठाते चलो।
सिर्फ सुख ही सुख में नहीं है मजा,
थोड़े दु:ख के भी किस्से सुनाते चलो।
क्या सारे सुखों को तुम्हीं सब चखोगे ?
कुछ औरों के लिए भी तो बचाते चलो।
नींद खुलेगी तो धरती पर ही गिरोगे,
जरा धरती पर ही पैर टिकाते चलो।
गैरों से तुम बातें भी ढंग से करोगे,
जरा अपनों से नाता बनाकर चलो।।
बदतमीजी करना बहुत बुरी बात है,
जरा संस्कारों को अपना निभाते चलो।
औरों का दिल तुमने बहुत ही दुखाया
जरा उनके दिल पर मरहम लगाते चलो।
तुम आगे बढ़ोगे तो अपने नजर उतारेंगे,
जरा अपनों के साथ कदम मिलाकर चलो॥